सीजी भास्कर, 3 नवंबर। कभी जंगलों और पहाड़ों के लिए पहचान रखने वाला बस्तर आज बिजली की रोशनी (Power Revolution in Bastar) से जगमगा रहा है। पिछले 25 वर्षों में इस आदिवासी बहुल अंचल ने ऊर्जा क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं। वर्ष 2000 में जहां एक गांव तक बिजली पहुंचाना चुनौती था, वहीं आज हर मजरा-टोला उजाले से रोशन है। अब बस्तर जिले में विद्युतीकरण का स्तर 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
जगदलपुर ग्रामीण संभाग के कार्यपालन अभियंता प्रदीप अग्रवानी के अनुसार, संभाग के सभी 578 गांव (Power Revolution in Bastar) अब पूरी तरह बिजली से जुड़ चुके हैं। राज्य निर्माण के समय जहां 3989 मजरा-टोले थे, वहीं अब 5107 तक बढ़ गए हैं—और हर एक तक बिजली की लाइनें पहुंच चुकी हैं। यह बदलाव सिर्फ तार और खंभों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में आया गहरा परिवर्तन है।
राज्य निर्माण के शुरुआती वर्षों में बस्तर में 33/11 केवी के सिर्फ छह सब स्टेशन थे। आज यह संख्या बढ़कर 27 तक पहुंच चुकी है, जिनकी कुल क्षमता 24 MVA से बढ़कर 138.70 MVA हो गई है। वहीं, 11 केवी लाइनों का नेटवर्क (Power Revolution in Bastar) 1390 किमी से बढ़कर 4850 किमी तक फैल गया है। कम वोल्टेज लाइनों की लंबाई भी अब 2257 से बढ़कर 6017 किलोमीटर हो गई है।
हालांकि इस सफर में कई मुश्किलें भी आईं। एक समय माओवादियों ने झारा घाटी में बिजली के टावर गिरा दिए थे, जिससे आधे से अधिक बस्तर अंधेरे में डूब गया था। इसके बाद क्षेत्रीय स्थिरता के लिए 450 करोड़ रुपये की लागत से परचनपाल में 400 केवी सब स्टेशन बनाया गया, जिसने बिजली आपूर्ति को स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बनाया। इसके अलावा, 132 केवी लाइनों की लंबाई 180 किमी से बढ़कर 254 किमी हो गई है।
इन उच्च वोल्टेज सब स्टेशनों के साथ कई आधुनिक ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं जिनकी नई क्षमता ने वोल्टेज ड्रॉप को कम किया और बिजली की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया। 220 केवी और 33 केवी स्तर पर भी कार्य पूरे किए गए हैं, जो दूरस्थ गांवों में भी निर्बाध बिजली सुनिश्चित कर रहे हैं।
बस्तर में उपभोक्ताओं की संख्या भी इसी अनुपात में बढ़ी है। वर्ष 2000 में जहां कुल उपभोक्ता केवल 5380 थे, वहीं अब यह संख्या दो लाख 19 हजार 450 तक पहुंच गई है। बीपीएल परिवारों की संख्या 30 हजार से बढ़कर 1.14 लाख, और कृषि पंप कनेक्शन 900 से बढ़कर 9083 हो गए हैं।
अग्रवानी ने बताया कि यह सफलता सौभाग्य योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना की संयुक्त उपलब्धि है। आने वाले समय में राज्य सौर ऊर्जा और नवीकरणीय बिजली परियोजनाओं (Power Revolution in Bastar) पर और ध्यान देगा, ताकि हर घर तक स्थायी उजियारा बना रहे। आज बस्तर न केवल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऊर्जा कहानी का नया अध्याय भी लिख रहा है। अंधेरे से उजाले की यह यात्रा आने वाले भारत का प्रतीक बन चुकी है।


