सीजी भास्कर 12 दिसम्बर कोनी क्षेत्र के ग्राम लोफंदी में बुधवार देर रात Pregnant Wife Murder का एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पूरे गांव को हिला दिया। आठ महीने की गर्भवती संतोषी को उसके पति जितेंद्र केंवट ने, तीन मासूम बच्चों की आंखों के सामने, सब्बल से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। वारदात के बाद आरोपी घर से भाग निकला और रातों-रात बाहर जाने की फिराक में था।
रिश्ते में बढ़ती खामोशी और शक का ज़हर
जितेंद्र और संतोषी की शादी साल 2016 में हुई थी। दोनों के तीन बच्चे—इशिता, सृष्टि और डेढ़ साल की मिष्टी—इसी घटना के दौरान नानी के घर मौजूद थे। नवंबर में जितेंद्र गांव लौटा, लेकिन घर में विवाद बढ़ने लगा। चरित्र शंका को लेकर आए दिन तनाव रहता था।
परिवार के मुताबिक, घटना वाली रात जितेंद्र नशे की हालत में आया, कुंती से खाना लिया और फिर संतोषी पर गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध होने पर वह शांत दिखा, लेकिन थोड़ी देर बाद पत्नी और बच्चों को पुराने मकान के कमरे में ले जाकर सोने की बात कह दी। इसी के बाद पूरी कहानी ने खौफनाक मोड़ ले लिया।
मासूम बेटी की चीख—“मां को मार दिया है”
रात करीब 12 बजे संतोषी की आठ वर्षीय बेटी सृष्टि दौड़ते हुए अपनी मौसी के कमरे में पहुँची और रोते हुए कहा—“पापा ने मां को मार दिया है…”
कुंती और परिवार के सदस्य जब पुराने मकान में पहुंचे, तो खाट पर पड़ी संतोषी खून से सनी हालत में मृत थी। खून और घबराहट से भरे इस दृश्य के बीच आरोपी जितेंद्र मौके से भाग चुका था।
घेराबंदी में फंसा आरोपी, पुणे भागने की फिराक में था
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची। आसपास के रास्तों पर घेराबंदी की गई। कुछ ही घंटों में आरोपी जितेंद्र गांव के बाहर पकड़ा गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह घटना के बाद पुणे जाने की कोशिश कर रहा था, ताकि वहां मजदूरी कर छिप सके।
मामले में Murder Accused Arrested जैसी स्थिति बनने पर पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मासूम बच्चों पर टूटा दुख का पहाड़
घटना के बाद घर टुटा-सा लगा। इशिता और सृष्टि दोनों डरी हुई थीं, नानी से चिपकी हुई। घर में भीड़ और पुलिस देख दोनों बार-बार रो पड़ती थीं। वहीं डेढ़ साल की मिष्टी सुबह से दूध के लिए बिलखती रही, जिसे मौसियों—कुंती और अनुसुइया—ने संभाला।
एक तरफ मां की मौत और दूसरी तरफ पिता का जेल जाना—तीनों बहनों के हिस्से बस सिसकियां, खामोशी और अनचाहा अंधेरा ही आया।





