सीजी भास्कर, 8 दिसंबर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर Pressure Irrigation Network (PIN) तकनीक अपनाकर सिंचाई क्षेत्र में नई क्रांति लाने की योजना बनाई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने भोपाल में इस तकनीक पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई पद्धति की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल और जल संरक्षण के अनुकूल है।
अपर मुख्य सचिव राजौरा ने कहा कि पारंपरिक नहर प्रणाली में कुल सिंचाई दक्षता लगभग 35 प्रतिशत होती है, जबकि Pressure Irrigation Network (PIN) में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच जाती है।
इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइन से पानी सीधे खेतों तक पहुँचता है, जिससे रिसाव और अपव्यय न्यूनतम हो जाता है। इसके साथ बिजली की भी महत्वपूर्ण बचत होती है और भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम रहती है।
मध्यप्रदेश में इस तकनीक का प्रयोग 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो रहा है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में इस प्रणाली का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए निर्देश दिए।
पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ चला जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरे कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती।
वहीं Pressure Irrigation Network (PIN) प्रणाली में पाइपलाइन के माध्यम से नियंत्रित दबाव से पानी खेतों तक पहुँचता है, जिससे अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस प्रणाली से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
PIN प्रणाली पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम होती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड क्षेत्रों तक भी पर्याप्त पानी मिलता है।
इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता, जल प्रबंधन और किसानों की आय में सुधार जैसी व्यापक लाभकारी स्थितियां प्राप्त होती हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा, अधीक्षण यंत्री विकास राजोरिया और अधीक्षण यंत्री शुभंकर विश्वास भी उपस्थित थे।


