सीजी भास्कर, 9 जनवरी। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत समर्थन मूल्य पर खरीफ में सोयाबीन, अरहर, उड़द तथा मूंग फसलों की खरीदी को लेकर राज्य सरकार ने सभी जिलों में निर्देश जारी किए थे। इसके अंतर्गत राज्य भर में विभिन्न सेवा सहकारी समितियों को उपार्जन केंद्र का दर्जा दिया गया। जिले में कुल 15 उपार्जन केंद्र चिन्हांकित किए गए हैं, जिसमें स्वर्ण उपज कृषक उत्पादक संगठन सुकुलदैहान को विशेष रूप से उपार्जन केंद्र के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस पहल से जिले में किसानों को सीधे लाभ पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है और राजनांदगांव पहला जिला बन गया जिसने प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme) के तहत सोयाबीन की खरीदी की।
राज्य सरकार द्वारा नाफेड (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ) के माध्यम से खरीफ की दलहन और तिलहन फसलों की खरीदी सुनिश्चित की जा रही है। किसानों को पहले ही समर्थन मूल्य जारी किया गया है। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5328 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग 8768 रूपए, उड़द 7800 रूपए और अरहर 8000 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। उपार्जन की मात्रा भी तय की गई है, जिसके अनुसार सोयाबीन 5 क्विंटल प्रति एकड़ और अन्य फसलें जैसे उड़द, अरहर तथा मूंग 3 क्विंटल प्रति एकड़ उपार्जन के लिए निर्धारित की गई हैं। इस व्यवस्था से किसानों को निश्चित लाभ मिलेगा और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी, जो प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme) की मुख्य विशेषता है।
राजनांदगांव जिले में प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme) के तहत सबसे पहली खरीदी किसान श्री हेमंत कुमार नायक और श्री विनोद वर्मा से स्वर्ण उपज बहुउद्देशीय कृषक उत्पादक संगठन सुकुलदैहान उपार्जन केंद्र में की गई। इस खरीदी में कुल 5 क्विंटल सोयाबीन की कीमत 26,640 रूपए बनी। आने वाले दिनों में और अधिक मात्रा में सोयाबीन, अरहर, मूंग एवं उड़द की फसल उपार्जन समितियों के माध्यम से खरीदी जाएगी।
उपसंचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि नाफेड द्वारा समृद्धि पोर्टल, जो एकीकृत किसान पोर्टल से लिंक है, के माध्यम से ऑनलाइन खरीदी की जा रही है। इससे किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलेगा। इस प्रणाली से खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हुई है और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का वास्तविक लाभ मिल रहा है। आने वाले वर्षों में यह प्रणाली दलहन और तिलहन क्षेत्र में विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण योजना के रूप में उभर कर सामने आएगी। इस पहल से किसानों में उत्साह बढ़ा है और प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme) के महत्व को और अधिक मजबूती मिली है।





