Project Kusha Air Defense India 2026 : भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के शुरुआती डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
DRDO और BEL की संयुक्त भूमिका
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में Defence Research and Development Organisation (DRDO) के साथ Bharat Electronics Limited की भी अहम भागीदारी है। हालिया परीक्षणों में ग्राउंड वैलिडेशन और ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर जैसे अहम सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया।
अब अगला चरण: इंटीग्रेटेड फ्लाइट टेस्ट
प्रोजेक्ट अब अपने अगले महत्वपूर्ण चरण ‘इंटीग्रेटेड फ्लाइट टेस्ट’ की ओर बढ़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस चरण की शुरुआत इसी वर्ष होने की संभावना है, जो इसकी तकनीकी क्षमता को वास्तविक परिस्थितियों में परखेगा।
क्या है प्रोजेक्ट कुशा की खासियत
‘प्रोजेक्ट कुशा’, जिसे एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम भी कहा जाता है, एक स्वदेशी लंबी दूरी की सुरक्षा प्रणाली है। इसे उन्नत विदेशी सिस्टम के बराबर विकसित किया जा रहा है, ताकि देश को रणनीतिक बढ़त मिल सके।
तीन-स्तरीय सुरक्षा कवच से लैस होगा सिस्टम
इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी तीन-लेयर डिफेंस क्षमता है। इसमें अलग-अलग दूरी की तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी, जो फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को पहचानकर उन्हें अलग-अलग स्तर पर नष्ट कर सकेंगी।
2030 तक पूरी तैनाती का लक्ष्य
योजना के अनुसार, 2026 में फ्लाइट टेस्ट की शुरुआत होगी, 2028 तक इसकी शुरुआती तैनाती और 2030 तक इसे पूरी तरह ऑपरेशनल बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। Indian Air Force ने इस सिस्टम के लिए कई स्क्वाड्रन की आवश्यकता को भी मंजूरी दे दी है।
भारत के रक्षा नेटवर्क को मिलेगा नया बल
यह परियोजना देश के व्यापक एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क का अहम हिस्सा बनेगी। आने वाले समय में इससे भारत की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी, साथ ही संभावित खतरों से निपटने की क्षमता भी कई गुना बढ़ जाएगी।


