Public Transport Crisis Raipur Reality : राजधानी रायपुर अब सिर्फ जिला मुख्यालय नहीं, बल्कि आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों के लिए रोज़गार, शिक्षा, इलाज और प्रशासन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। हर सुबह हजारों लोग शहर की ओर रुख करते हैं और शाम ढलते-ढलते यही भीड़ वापसी में तब्दील हो जाती है। लेकिन इस बढ़ते आवागमन के अनुपात में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था आज भी बेहद सीमित है (Urban Mobility Issue)।
पीक ऑवर में जाम ही जाम
सुबह दफ्तर और शाम को वापसी के समय टाटीबंध, धरसींवा, मंदिरहसौद, अभनपुर रोड, आरंग रोड और दुर्ग-भिलाई कनेक्टिंग मार्ग पर हालात एक जैसे रहते हैं। सड़कें गाड़ियों से भरी होती हैं और रफ्तार पैदल चलने से भी धीमी हो जाती है। निजी वाहन, ऑटो और अवैध सवारी साधन मिलकर ट्रैफिक को और उलझा देते हैं।
मजबूरी में निजी वाहन
यात्रियों का कहना है कि बसें कम हैं, रूट सीमित हैं और समय तय नहीं। ऐसे में दफ्तर, कॉलेज या अस्पताल पहुंचने के लिए बाइक या कार ही एकमात्र विकल्प बचता है। यही मजबूरी सड़कों पर वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ा रही है।
बस मिले तो गाड़ी छोड़ देंगे
दैनिक यात्रियों और ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों की राय लगभग एक जैसी है—अगर सस्ती, सुरक्षित और समय पर चलने वाली बस सेवा मिले, तो लोग खुशी-खुशी निजी वाहन छोड़ सकते हैं। नियमित बस संचालन से हजारों वाहन सड़कों से कम हो सकते हैं, जिससे जाम और सड़क हादसों दोनों में कमी आएगी।
इलाकों में घंटों का इंतजार
पचपेढ़ी नाका, भारतमाता चौक, कचना, तेलीबांधा और सेजबहार जैसे इलाकों में सिटी बसों की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है। कई जगह यात्रियों को बस के लिए आधे से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। मजबूरी में लोग ऑटो या ई-रिक्शा पकड़ते हैं, जहां किराया पूरी तरह मनमाना है।
जेब पर भारी सफर
7 से 10 किलोमीटर की दूरी के लिए 100 से 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। रोज़ाना आने-जाने वालों के लिए यह खर्च महीने के अंत में बड़ा बोझ बन जाता है। खासकर नौकरीपेशा और छात्रों के लिए यह स्थिति लगातार मुश्किल होती जा रही है।
कचना-पिरदा और सेजबहार
कचना-पिरदा क्षेत्र में दर्जनों कॉलोनियां और हाउसिंग सोसायटी हैं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन लगभग नदारद है। लोगों को ऑटो ढूंढने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। सेजबहार जैसे इलाकों में पहले चलने वाली सिटी बसें बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों यात्रियों की दिनचर्या प्रभावित हुई है।
बस सेवा मजबूत हो
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सिटी बस सेवा को दोबारा सशक्त किया जाए, नए रूट जोड़े जाएं और तय समय-सारिणी का सख्ती से पालन हो, तो रायपुर को ट्रैफिक जाम से काफी हद तक राहत मिल सकती है। आम जनता प्रशासन से उम्मीद कर रही है कि राजधानी की सड़कों को सिर्फ चौड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्थित भी बनाया जाए।




