सीजी भास्कर, 10 अक्टूबर। देश को दालों के आयात पर निर्भरता से मुक्त कराने की दिशा में बड़ा कदम (Pulse Self-Sufficiency Mission) उठाया गया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2030-31 तक देश में दलहन उत्पादन को 40 प्रतिशत बढ़ाकर 350 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए रकबा बढ़ाने से लेकर उन्नत बीजों के वितरण, प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और किसानों को सहयोग देने जैसी कई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। अभी हर साल 60 से 70 लाख टन दालों का आयात करना पड़ता है, लेकिन अब इस पर ब्रेक लगाकर भारत को दलहन उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है।
इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की दो बड़ी योजनाओं ‘धन धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भर मिशन’ (Pulse Self-Sufficiency Mission) की शुरुआत करेंगे। इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई योजना में सरकार ने 11,440 करोड़ रुपये के छह वर्षीय केंद्रीय कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जो विशेष रूप से अरहर, उड़द और मसूर जैसी प्रमुख फसलों पर केंद्रित रहेगा।
योजना के मुख्य बिंदु हैं बीज की गुणवत्ता में सुधार (Pulse Self-Sufficiency Mission), कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों की पहचान, मिनी बीज किट का वितरण, और देशभर में एक हजार प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना। अभी दलहनों की औसत उत्पादकता 881 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जिसे बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराएगी और 86 लाख बीज किट निशुल्क बांटेगी। हर प्रसंस्करण इकाई के लिए 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि धन धान्य योजना के तहत 100 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इन जिलों में सिंचाई, भंडारण, ऋण सुविधा और फसल विविधीकरण (Pulse Self-Sufficiency Mission) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। योजना की निगरानी के लिए नीति आयोग डैशबोर्ड तैयार करेगा, जो 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को जोड़कर लागू करेगा।
सरकार का लक्ष्य केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और पोषण सुरक्षा (Pulse Self-Sufficiency Mission) को भी सुनिश्चित करना है। किसानों को प्रोसेसिंग से जोड़कर मूल्यवर्धन का लाभ मिलेगा। साथ ही, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 15 लाख किसानों का चयन किया गया है और 6.2 लाख हेक्टेयर भूमि पर इसका विस्तार किया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दस हजार एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) का गठन पहले ही पूरा किया जा चुका है, जिनमें से 1,100 एफपीओ का टर्नओवर एक करोड़ रुपये से अधिक है। ये एफपीओ उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण कार्य भी कर रहे हैं। इन प्रयासों से देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी, किसानों की आमदनी बढ़ेगी और दालों के आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।


