Raghav Chadha News : आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र लिखकर बेहद चौंकाने वाला आग्रह किया है। पार्टी ने सचिवालय से कहा है कि भविष्य में होने वाली चर्चाओं के दौरान सांसद राघव चड्ढा को पार्टी के निर्धारित कोटे से बोलने का समय आवंटित न किया जाए। इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि आखिर संसद के आगामी सत्रों में चड्ढा किसी भी विषय पर अपनी बात कैसे रख पाएंगे।
संसद में समय आवंटन की क्या है प्रक्रिया?
संसदीय नियमों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय सदन में मौजूद राजनीतिक दलों के संख्याबल के आधार पर उन्हें बोलने के लिए समय का बंटवारा करता है। जब किसी विषय पर लंबी बहस का निर्णय लिया जाता है, तो सचिवालय तय करता है कि किस दल को कितने मिनट मिलेंगे। इसके बाद संबंधित पार्टी यह सूची सचिवालय को सौंपती है कि उनके कोटे के समय में से कौन सा सांसद भाषण देगा।
क्या सचिवालय के लिए पार्टी का आग्रह मानना अनिवार्य है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई पार्टी अपने ही सांसद को समय न देने का आग्रह करती है, तो इसे मानना या न मानना पूरी तरह से सभापति या सचिवालय के विवेक पर निर्भर करता है। संसदीय लोकतंत्र में सिर्फ दल के आग्रह पर किसी निर्वाचित सदस्य की आवाज को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। यदि पार्टी किसी सांसद को निष्कासित भी कर देती है, तब भी सभापति उसे एक निर्दलीय सदस्य के रूप में बोलने की अनुमति दे सकते हैं।
समय न मिलने पर राघव चड्ढा के पास क्या हैं विकल्प?
अगर पार्टी का कोटा उपलब्ध न भी हो, तो भी एक सांसद के पास सदन में अपनी बात रखने के कई अन्य संवैधानिक रास्ते होते हैं। राघव चड्ढा ‘जीरो ऑवर’ (शून्यकाल) के दौरान जनहित के मुद्दे उठा सकते हैं या विभिन्न संसदीय नोटिस के जरिए अपनी बात रख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वे ‘स्पेशल मेंशन’ (विशेष उल्लेख) के माध्यम से भी सदन का ध्यान किसी विशिष्ट विषय की ओर आकर्षित करने की शक्ति रखते हैं।


