नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से आए आदिवासी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जल, जंगल, जमीन, शिक्षा, धर्म कोड और आदिवासी नेतृत्व जैसे विषयों पर गहराई से चर्चा हुई। यह संवाद करीब एक घंटे चला, जिसमें आदिवासी समाज के समक्ष खड़े गंभीर मुद्दों को लेकर रणनीति तय की गई।
कौन-कौन रहे शामिल?
इस अहम बैठक में छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, मोहन मरकाम, अनिला भेड़िया, पूर्व राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम, विधायक जनकराम ध्रुव, अंबिका मरकाम, और विद्यावती सिदार सहित कई अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे।
अलग धर्म कोड की उठी मांग
विधायक जनकराम ध्रुव ने बैठक में आदिवासी समाज के लिए अलग धर्म कोड की मांग को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने संसद में इस मुद्दे को ज़ोरदार ढंग से उठाने की अपील की और कहा कि इससे आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता को मजबूती मिलेगी।
बस्तर-सर्गुजा में युवा नेतृत्व पर ज़ोर
ध्रुव ने बस्तर और सरगुजा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर नेतृत्व तैयार करने की वकालत की। उनका मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत स्थानीय नेतृत्व से ही संभव है।
पेड़ कटाई, फर्जी मुठभेड़ और PESA कानून का उल्लंघन
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों के चलते जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। विधायक ध्रुव ने आरोप लगाया कि PESA कानून (पंचायत्स एक्सटेंशन टू शेड्यूल एरिया एक्ट) का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और फर्जी मुठभेड़ों में आदिवासी युवाओं की हत्या हो रही है।
फंड के दुरुपयोग का आरोप
नेताओं ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा आदिवासी विकास के लिए जारी किया गया फंड राज्य सरकार द्वारा अन्य कार्यों में खर्च किया जा रहा है। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता आदिवासी समाज के साथ अन्याय है।
“वनवासी” शब्द पर तीखा विरोध
भाजपा द्वारा आदिवासियों को “वनवासी” कहे जाने पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। आदिवासी नेताओं ने कहा कि यह न सिर्फ एक शब्द है, बल्कि आदिवासी अस्मिता पर सीधा हमला है। एक नेता ने तंज कसते हुए कहा, “आज हमें वनवासी कहा जा रहा है, कल स्वर्गवासी न बना दिया जाए।”
शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि आदिवासी इलाकों में स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। बच्चों को मूलभूत शिक्षा सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदाय का भविष्य खतरे में है।
राहुल गांधी का आश्वासन
राहुल गांधी ने सभी नेताओं की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को सम्मान, अधिकार और पहचान दिलाना पार्टी की प्राथमिकता है।





