रायगढ़ जिले में गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का स्पष्ट असर देखने को मिला। ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर कोल इंडिया की कई कोयला खदानों में कामकाज पूरी तरह बंद रहा। सुबह से ही खदान क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा रहा और उत्पादन गतिविधियां ठप रहीं। इस घटनाक्रम को स्थानीय स्तर पर Raigarh Bharat Bandh Impact के रूप में देखा जा रहा है।
छाल समेत कई खदानों में उत्पादन रुका
इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस से जुड़े सदस्य एसईसीएल की छाल खदान के पास एकत्र हुए और एक दिवसीय धरना देकर विरोध दर्ज कराया। हड़ताल के कारण छाल, जामपाली, बरौद, बेजारी सहित अन्य खदानों में उत्पादन और परिवहन कार्य प्रभावित हुआ। कोयला डिस्पैच बाधित होने से लॉजिस्टिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा। यह स्थिति पूर्ण Coal Mine Shutdown की तरह रही, जहां मशीनें और श्रमिक दोनों निष्क्रिय नजर आए।
चार श्रम संहिताओं पर उठे सवाल
यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि इन कानूनों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे और निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने इसे व्यापक Labour Law Protest का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह आंदोलन श्रमिक हितों की रक्षा के लिए है।
संयुक्त मंच के आह्वान पर समर्थन
केंद्रीय श्रम संगठनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर जिले में भी हड़ताल का समर्थन किया गया। शहर में प्रतीकात्मक धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसे स्थानीय स्तर पर Trade Union Strike की एकजुटता का प्रदर्शन माना गया।
जनजीवन सामान्य, आगे आंदोलन की चेतावनी
हालांकि खदान क्षेत्रों में असर स्पष्ट रहा, लेकिन स्कूल, बाजार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा। आम जनजीवन सामान्य रूप से चलता रहा। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।




