सीजी भास्कर, 09 जनवरी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी के बाद उन्हें दिए जा रहे भोजन को लेकर सियासी घमासान (Raigarh Municipal Corporation) मच गया है। नगर निगम की ओर से चलाए जा रहे नसबंदी अभियान के तहत कुत्तों को खिचड़ी, दलिया और बिरयानी जैसे पौष्टिक आहार दिए जाने की व्यवस्था की गई है, जिस पर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
महापौर जीवर्धन चौहान ने बताया कि शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए यह अभियान जरूरी है। नसबंदी के बाद कुत्तों की सेहत कमजोर न पड़े, इसलिए तय मानकों के अनुसार पोषण आहार दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया टेंडर के तहत एजेंसी द्वारा कराई जा रही है और पशु चिकित्सकों की निगरानी में है।
विपक्ष का सवाल: खर्च और पारदर्शिता
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने भोजन व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर कुत्तों को बिरयानी दी जा रही है तो यह स्पष्ट (Raigarh Municipal Corporation) किया जाए कि वह किस प्रकार की है और इसके लिए खर्च की जा रही राशि किस मद से आती है। उन्होंने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि भोजन की दरें पहले से तय हैं और क्या खिलाया जाएगा, यह संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी है। निगम का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि नसबंदी के बाद कुत्तों को उचित देखभाल मिले, ताकि अभियान प्रभावी और सफल हो सके।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाना अनिवार्य है। इसी दिशा में निगम यह अभियान (Raigarh Municipal Corporation) चला रहा है, हालांकि भोजन को लेकर उठे सवालों ने पूरे मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया है।


