सीजी भास्कर, 22 जनवरी | Raipur Commissioner System: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। 23 जनवरी 2026 से रायपुर जिले के एक हिस्से में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत जिले की पुलिस व्यवस्था को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण इलाकों की पुलिसिंग अलग-अलग ढांचे में काम करेगी।
21 थाने कमिश्नर, 12 थाने SP के अधीन
नई व्यवस्था के अनुसार रायपुर जिले के 21 थाने पुलिस कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे, जबकि 12 थानों की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक (SP) के पास होगी। गृह विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिससे प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है।
भोपाल-इंदौर मॉडल से ली गई प्रेरणा
यह व्यवस्था मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में लागू पुलिसिंग मॉडल के आधार पर तैयार की गई है। वहां शहरी इलाकों में कमिश्नरेट सिस्टम और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पुलिस व्यवस्था लागू है। रायपुर में भी इसी तर्ज पर पुलिस फोर्स को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है।
पूरे जिले में लागू न होने पर उठे सवाल
शुरुआत में यह माना जा रहा था कि कमिश्नर सिस्टम पूरे रायपुर जिले में लागू होगा। इसको लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं भी तेज थीं। हालांकि कैबिनेट स्तर पर हुई बैठकों के बाद केवल आधे जिले में इस सिस्टम को लागू करने का फैसला लिया गया।
IPS लॉबी में असंतोष
विभागीय स्तर पर इस फैसले को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। IPS अधिकारियों का मानना है कि अधूरी कमिश्नरी व्यवस्था से दो अलग-अलग प्रशासनिक स्ट्रक्चर खड़े करने पड़ेंगे। इसके लिए न तो पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध है और न ही संसाधन, जिससे सिस्टम केवल औपचारिक बनकर रह सकता है।
सीमाओं के बंटवारे पर भी नाराजगी
अधिकारियों के मुताबिक थानों की सीमाओं का निर्धारण संतुलित तरीके से नहीं किया गया। कुछ ग्रामीण इलाकों को कमिश्नरी क्षेत्र में शामिल किया गया है, जबकि कई घनी आबादी वाले इलाके ग्रामीण पुलिसिंग सेटअप में चले गए हैं। इसे लेकर आंतरिक असहमति सामने आ रही है।
कमेटी की सिफारिशें भी रहीं नजरअंदाज
वरिष्ठ स्तर पर गठित एक कमेटी ने रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और अपराध दर को देखते हुए पूरे जिले में कमिश्नर सिस्टम लागू करने की अनुशंसा की थी। कमेटी का तर्क था कि राजधानी का आकार इतना बड़ा नहीं है कि दो तरह की पुलिस व्यवस्था चलाई जाए, लेकिन इस सुझाव पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
पुलिस बल की कमी बनेगी बड़ी चुनौती
राजधानी जैसे शहर में एक थाने के लिए औसतन 75 पुलिसकर्मियों की जरूरत मानी जाती है, जबकि मौजूदा समय में कई थानों में 30 से 35 का ही बल तैनात है। नई व्यवस्था के बाद पुलिस फोर्स के बंटवारे से फील्ड ड्यूटी पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा
जिले में दो अलग-अलग पुलिसिंग सिस्टम लागू होने से अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन जमीनी स्तर पर तैनात बल घट सकता है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था राजधानी की कानून-व्यवस्था को मजबूत करती है या प्रशासनिक चुनौती बनकर सामने आती है।




