सीजी भास्कर, 20 जनवरी | रायपुर। रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हुई आगजनी की घटना अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर सियासी बहस का रूप ले चुकी है। Raipur DEO Fire Case को लेकर कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि केवल विभागीय जांच से सच्चाई सामने नहीं आएगी।
कांग्रेस का आरोप—जांच को दबाने की कोशिश
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार इस पूरे मामले को विभागीय प्रक्रिया तक सीमित रखकर गंभीर सवालों से बचना चाहती है। उनके मुताबिक, Raipur DEO Fire Case जैसी संवेदनशील घटना में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि जनता के सामने सच्चाई स्पष्ट हो सके।
अहम दस्तावेज जले, संदेह और गहरा
कांग्रेस ने दावा किया है कि आगजनी में शिक्षा विभाग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें नष्ट हो गई हैं। इनमें मिड-डे मील योजना, निजी स्कूलों और मदरसों को मिलने वाले अनुदान, विभागीय पदोन्नति और निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इतनी अहम फाइलों का एक साथ जलना सामान्य घटना नहीं हो सकती।
भ्रष्टाचार छिपाने की आशंका जताई
कांग्रेस का आरोप है कि यह आगजनी कहीं न कहीं कथित भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश हो सकती है। पार्टी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा विभाग लगातार विवादों में रहा है और Education Department Corruption अब एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।
हाईकोर्ट जज की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस ने इस मामले में हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग रखी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे पहले भी प्रदेश में सबूत नष्ट होने के मामलों पर सवाल उठे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।
पुराने मामलों का हवाला देकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस ने पूर्व की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी सरकारी दफ्तरों में आग लगने के मामलों में सबूत मिटाने के आरोप लगे थे। पार्टी का आरोप है कि आगजनी के जरिए फाइलें नष्ट करना कोई नया तरीका नहीं है, बल्कि यह पहले भी देखा जा चुका है।
प्रशासनिक जांच जारी, राजनीति तेज
फिलहाल डीईओ कार्यालय आगजनी मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। वहीं कांग्रेस के आरोपों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में Judicial Probe Demand को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।




