Raipur Marine Drive Parking Fee : रायपुर के तेलीबांधा तालाब स्थित मरीन ड्राइव क्षेत्र में नगर निगम ने पार्किंग शुल्क की व्यवस्था लागू कर दी है। फैसले के लागू होते ही शहर में इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। बड़ी संख्या में लोग इस सार्वजनिक स्थल पर बिना किसी शुल्क के आने-जाने के आदी रहे हैं, ऐसे में नई व्यवस्था ने आम नागरिकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं।
“सार्वजनिक जगह पर शुल्क क्यों?”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मरीन ड्राइव केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि शहर के लोगों के लिए रोजमर्रा की खुली सार्वजनिक स्पेस है। शाम की सैर, परिवार के साथ समय और युवाओं की मुलाकातों के लिए यह इलाका पहचाना जाता है, ऐसे में पार्किंग शुल्क को गैरज़रूरी बताया जा रहा है।
महापौर ने दी स्पष्ट प्रतिक्रिया
विरोध के बीच महापौर ने सफाई देते हुए कहा कि जो लोग आसपास के रेस्टोरेंट और कैफे में हजारों रुपये खर्च करते हैं, उन्हें सीमित पार्किंग शुल्क से असहज नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अव्यवस्थित पार्किंग के कारण यातायात प्रभावित होता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह कदम जरूरी था।
कितना देना होगा शुल्क
नगर निगम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दोपहिया वाहनों के लिए 10 रुपये और चारपहिया वाहनों के लिए 20 रुपये पार्किंग शुल्क तय किया गया है। यह शुल्क दोपहर 12 बजे के बाद लागू होगा, जबकि सुबह से 12 बजे तक पार्किंग पूरी तरह निशुल्क रहेगी। मॉर्निंग वॉक करने वालों से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
15 दिन का परीक्षण चरण
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था फिलहाल 15 दिनों के ट्रायल के तौर पर लागू की गई है। इस दौरान लोगों की प्रतिक्रिया, यातायात पर असर और पार्किंग व्यवस्था की स्थिति का आकलन किया जाएगा। ट्रायल पूरा होने के बाद ही इसे स्थायी रूप देने या बदलाव करने पर निर्णय लिया जाएगा।
विरोध और समर्थन दोनों
पार्किंग शुल्क को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी नेताओं ने इसे राजस्व बढ़ाने का जरिया बताते हुए जनता पर अतिरिक्त बोझ करार दिया है। उनका कहना है कि नगर निगम अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर शुल्क लगा रहा है।
पहले भी हो चुका है प्रयोग
यह पहला मौका नहीं है जब मरीन ड्राइव पर पार्किंग शुल्क लगाया गया हो। वर्ष 2021 में भी ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन विरोध के बाद उसे वापस लेना पड़ा था। मौजूदा फैसले को लेकर भी वही पुरानी बहस एक बार फिर सामने आ गई है।
व्यवस्था सुधार पर जोर
नगर निगम का तर्क है कि इस कदम का मकसद केवल राजस्व नहीं, बल्कि अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण और यातायात को सुचारू बनाना है। प्रशासन का कहना है कि अंतिम निर्णय लोगों की प्रतिक्रिया और ट्रायल के नतीजों के आधार पर लिया जाएगा।




