Raipur Silver Business : रायपुर में चांदी के व्यापार की एक पुरानी परंपरा को आज भी एक परिवार मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। प्रिंस सोनी का परिवार वर्ष 1950 से सिल्वर कारोबार से जुड़ा हुआ है। उनके दादाजी जगराम सोनी राजस्थान के जोधपुर से रायपुर आए थे और यहां चांदी का कारखाना शुरू किया था। उस दौर में रायपुर को सिल्वर व्यापार का एक प्रमुख केंद्र माना जाता था, जहां दूर-दूर से व्यापारी चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदने आते थे।
गुणवत्ता और फिनिशिंग से बनाई खास पहचान
जगराम सोनी ने अपने काम में बेहतरीन क्वालिटी और शानदार फिनिशिंग के दम पर बाजार में अलग पहचान बनाई। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया और रायपुर के सिल्वर मार्केट में उनका नाम भरोसे के साथ लिया जाने लगा। परिवार की यही परंपरा और अनुभव आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार बन गया।
नई सोच के साथ शुरू हुई ‘सृष्टि सिल्वर’
पारिवारिक कारोबार को आधुनिक रूप देने के उद्देश्य से प्रिंस सोनी ने “सृष्टि सिल्वर” की शुरुआत की। उनके इस आउटलेट में ग्राहकों को देशभर के अलग-अलग हिस्सों से लाई गई सिल्वर ज्वेलरी एक ही जगह देखने को मिलती है। उनका प्रयास रहता है कि ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता, सही वजन और ट्रेंड के अनुसार नए डिजाइन उपलब्ध कराए जाएं।
देशभर की प्रदर्शनियों से लाते हैं नए डिजाइन
प्रिंस सोनी नियमित रूप से देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित होने वाली सिल्वर प्रदर्शनियों में हिस्सा लेते हैं। इन आयोजनों के जरिए वे नई वैरायटी और लेटेस्ट डिजाइन की जानकारी जुटाते हैं और उन्हें रायपुर के ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। उनका मानना है कि समय के साथ ग्राहकों की पसंद भी बदलती है, इसलिए बाजार में नए डिजाइन लाना जरूरी है।
रायपुर में बड़े आउटलेट की तैयारी
भविष्य की योजना को लेकर प्रिंस सोनी का कहना है कि वे रायपुर में लगभग 6000 स्क्वायर फीट का बड़ा सिल्वर आउटलेट शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस बड़े शोरूम में ग्राहकों को सिल्वर ज्वेलरी और अन्य उत्पादों की अधिक वैरायटी मिलेगी, साथ ही खरीदारी का अनुभव भी पहले से बेहतर होगा।
सम्मान से बढ़ा उत्साह, काम को मिली नई प्रेरणा
प्रिंस सोनी के अनुसार इंडिया प्राइड अवार्ड उनके काम की सराहना का प्रतीक है। उनका कहना है कि इस तरह के सम्मान से उन्हें अपने कारोबार को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही वे चाहते हैं कि रायपुर में सिल्वर व्यापार की पुरानी पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए।





