सीजी भास्कर 26 फ़रवरी रायपुर। (Raipur Tehsil office chaos) के तहत राजधानी के तहसील कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब हाईकोर्ट में अपील से जुड़ी नकल कॉपी समय पर नहीं मिलने को लेकर विवाद बढ़ गया। दफ्तर के भीतर हुए हंगामे का वीडियो सामने आते ही मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिससे (public service disruption) को लेकर सवाल उठने लगे।
नकल कॉपी में देरी से भड़का विवाद
जानकारी के मुताबिक कुछ वकील आवश्यक दस्तावेज़ों की नकल कॉपी लेने पहुंचे थे। आरोप है कि तय समय-सीमा के भीतर कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई। देरी के कारण बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई। इस पूरे घटनाक्रम ने (court document delay) की पुरानी समस्या को फिर चर्चा में ला दिया।
कर्मचारियों पर बदसलूकी के आरोप
तहसील कार्यालय के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बहस के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ और दबाव बनाने की कोशिश की गई। एक कर्मचारी ने नाम के साथ जाति पूछकर अपमानित किए जाने और धमकी दिए जाने की शिकायत की है। यह घटनाक्रम (workplace harassment complaint) के दायरे में आता है, जिस पर औपचारिक जांच की मांग उठी है।
वकील पक्ष ने लगाए अवैध वसूली के आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता Krishna Kumar Tripathi ने दावा किया कि नकल कॉपी के एवज में कथित तौर पर ‘खर्चे’ की मांग की गई, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। उनके अनुसार यह मामला (alleged bribery demand) से जुड़ा है और कार्यालयी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच के संकेत
मामले पर एसडीएम Nand Kumar Chaubey ने कहा कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति थी, तो औपचारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी। पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इसे (administrative inquiry) की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
ऑनलाइन–ऑफलाइन प्रक्रियाओं पर फिर उठा सवाल
घटना के बाद राजस्व दफ्तरों में ऑनलाइन–ऑफलाइन कामकाज की जटिलताओं पर चर्चा तेज हो गई है। आम लोगों और वकीलों का कहना है कि प्रक्रियाओं की स्पष्टता नहीं होने से टकराव की स्थिति बनती है। (process transparency) बढ़ाने की मांग एक बार फिर सामने आई है।






