Rajim Violence Displacement Crisis 2026 : Gariaband जिले के दुतकैया गांव में 1 फरवरी को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पीड़ित परिवारों के मुताबिक, हमलों के बाद उन्हें गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा, जिससे उनका पूरा जीवन प्रभावित हो गया है।
विवाद से भड़की हिंसा, कई घरों में आगजनी
बताया जा रहा है कि घटना की शुरुआत दो पक्षों के युवकों के बीच विवाद से हुई थी, जो बाद में बढ़कर सांप्रदायिक तनाव में बदल गया। आरोप है कि इसके बाद एक पक्ष के 10 से 11 घरों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे गांव में भय का माहौल बन गया।
धार्मिक अपमान और जबरन नारे के आरोप
पीड़ितों ने दावा किया है कि हमलावरों ने धार्मिक ग्रंथों का अपमान किया और लोगों को जबरन नारे लगाने के लिए मजबूर किया। साथ ही मारपीट और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे लोगों में गहरी दहशत है।
रायपुर में शरण, 50 से ज्यादा लोग विस्थापित
डर के कारण कई परिवार रातों-रात Raipur में शरण लेने को मजबूर हुए। फिलहाल 8 से 10 परिवारों के करीब 40 से 50 लोग, जिनमें 17 बच्चे शामिल हैं, अस्थायी रूप से यहां रह रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर
इस पूरी घटना का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। कई छात्र पिछले डेढ़ महीने से स्कूल नहीं जा पाए हैं और केवल परीक्षा देने के लिए ही पहुंचे। उनका कहना है कि पढ़ाई का माहौल खत्म हो गया है और वे सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं।
हमले से पहले CCTV तोड़े, फिर घरों में घुसे हमलावर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ा और फिर घरों में घुसकर तोड़फोड़ की। चाकू और लोहे की रॉड से हमला किए जाने के भी आरोप लगे हैं। कुछ परिवारों ने एक कमरे में छिपकर अपनी जान बचाई, जहां धुएं और आग के बीच हालात बेहद मुश्किल थे।
पुलिस पर देरी से कार्रवाई का आरोप
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने समय रहते पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन फोर्स देर से पहुंची। हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रण में लाया गया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।
न्याय और सुरक्षा की मांग
पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, नुकसान की भरपाई की जाए और गांव में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे दोबारा अपने घर लौटकर सामान्य जीवन शुरू कर सकें।


