प्रदेश में पर्यटन विस्तार के दावों के बीच राम वनगमन पथ से जुड़े 23 स्थलों पर बीते कुछ वर्षों में करीब 97 करोड़ रुपये खर्च किए गए, मगर ज़मीनी तस्वीर दावों से मेल नहीं खाती। कई जगहों पर निर्माण आधा-अधूरा है, तो कहीं सुविधाएं शुरू होने से पहले ही मरम्मत मांगने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि (Ram Van Gaman Path Development) का असर फिलहाल आंकड़ों तक सीमित दिख रहा है।
सबसे ज्यादा बजट, सबसे ज्यादा सवाल
चंदखुरी और शिवरीनारायण—इन दो प्रमुख स्थलों पर कुल बजट का बड़ा हिस्सा गया, फिर भी मूलभूत सुविधाओं की कमी साफ दिखती है। प्रवेश द्वार, घाटों की फिनिशिंग, बैठने की व्यवस्था और साफ पेयजल जैसे काम अब भी अधूरे हैं। पर्यटकों की आवाजाही कम होने से (Chandkhuri Shivrinayran Project) की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्वागत द्वार अधूरा, घाट असुरक्षित
शिवरीनारायण में प्रस्तावित स्वागत द्वार वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया। घाटों पर सीढ़ियों की ऊंच-नीच, रेलिंग का अभाव और कमजोर रोशनी शाम के समय जोखिम बढ़ाती है। चंदखुरी परिसर में प्रतिमा और संरचनाओं की रंगत उखड़ने लगी है, जिससे (Tourism Infrastructure Gap) की हकीकत सामने आती है।
खर्च हुआ, असर दिखा नहीं
वर्षवार खर्च की तस्वीर बताती है कि अलग-अलग दौर में भारी बजट जारी हुआ, लेकिन कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर सवाल बने रहे। कुछ स्थानों पर परियोजनाएं शुरू होकर रुक गईं, तो कुछ पर निर्माण पूरा होने से पहले ही मरम्मत की जरूरत पड़ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि (Budget Utilization in Tourism) की पारदर्शी मॉनिटरिंग के बिना परिणाम नहीं दिखेंगे।
स्थानीय नागरिकों और पर्यटक संगठनों की मांग है कि लंबित कार्यों की समयबद्ध समीक्षा हो, ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए और रख-रखाव के लिए अलग फंड बनाया जाए। अगर अधूरी सुविधाएं समय पर पूरी हो जाएं, तो (Ram Van Gaman Path Development) क्षेत्रीय पर्यटन और रोजगार—दोनों के लिए असरदार साबित हो सकता है।




