सीजी भास्कर, 18 दिसंबर।भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक बार फिर सख्त कदम (RBI action on banks) उठाया है। इस बार कार्रवाई की जद में असम स्थित गुवाहाटी कोऑपरेटिव अर्बन बैंक आया है, जिस पर आरबीआई ने कई गंभीर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इन निर्देशों का सीधा असर बैंक के ग्राहकों पर पड़ेगा, क्योंकि अब वे अपने ही खाते से तय सीमा से ज्यादा राशि नहीं निकाल सकेंगे।
आरबीआई के आदेश के अनुसार, बैंक के किसी भी ग्राहक को बचत, चालू या अन्य खातों से अधिकतम 35,000 रुपये तक ही निकासी की अनुमति दी गई है। इससे अधिक रकम निकालने पर फिलहाल पूरी तरह रोक रहेगी।
बैंक बंद होते ही लागू हुए आदेश
रिजर्व बैंक की ओर से जारी सभी निर्देश मंगलवार को बैंकिंग समय समाप्त होते ही प्रभावी हो गए। ये प्रतिबंध शुरुआती तौर पर अगले छह महीनों (RBI action on banks) तक लागू रहेंगे। इस दौरान बैंक की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की ढील केवल आरबीआई की पूर्व अनुमति के बाद ही संभव होगी।
निर्देशों के तहत गुवाहाटी कोऑपरेटिव अर्बन बैंक न तो कोई नया कर्ज दे सकेगा और न ही पहले से जारी ऋणों का नवीनीकरण कर पाएगा। इसके अलावा, बैंक किसी नए निवेश, नई देनदारी या भुगतान से जुड़ा कोई फैसला भी नहीं ले सकेगा।
नकदी संकट बना कार्रवाई की वजह
रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि बैंक की मौजूदा नकदी स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। नियामक संस्था का कहना है कि जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक बैंक की वित्तीय स्थिति में ठोस सुधार नहीं दिखता, तब तक सख्त नियंत्रण जरूरी है।
हालांकि, ग्राहकों को यह राहत जरूर दी गई है कि वे अपने जमा के बदले ऋण समायोजन (Loan Adjustment) की सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।
जमाकर्ताओं के लिए बीमा सुरक्षा बरकरार
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि पात्र जमाकर्ता डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के तहत पांच लाख रुपये तक की बीमा दावा राशि पाने के हकदार ((RBI action on banks)) रहेंगे। यह बीमा कवर ग्राहकों को संभावित वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए उपलब्ध रहेगा।
बोर्ड और प्रबंधन को पहले ही दी गई थी चेतावनी
रिजर्व बैंक के अनुसार, हाल के महीनों में बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत की गई थी। उद्देश्य था बैंक के कामकाज में सुधार और पर्यवेक्षी चिंताओं को दूर करना। लेकिन अपेक्षित ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण अंततः यह सख्त निर्णय लेना पड़ा।





