सीजी भास्कर, 01 अक्टूबर। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC Decision) ने बुधवार को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। यानी नीतिगत ब्याज दर फिलहाल 5.50% पर बनी रहेगी। इस तरह आम लोगों को सस्ते कर्ज का इंतजार और लंबा हो गया।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। इनमें महंगाई का नरम होना, विदेशी निवेश में मजबूती और ऋण प्रवाह का बढ़ना शामिल है।
महंगाई पर आरबीआई की राय
गवर्नर ने बताया कि अगस्त तक मुद्रास्फीति का परिदृश्य उम्मीद से बेहतर रहा है। जून में कोर इंफ्लेशन 3.7% था, जो अगस्त तक घटकर 3.1% पर आ गया और अब इसे और घटाकर 2.6% तक पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य कीमतों में कमी और जीएसटी कटौती की वजह से यह राहत देखने को मिली है।
RBI ने ताजा अनुमान में FY26 के लिए मुद्रास्फीति दर को 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया है।
Q2FY26 (जुलाई-सितंबर): 1.8%
Q3FY26 (अक्टूबर-दिसंबर): 1.8%
Q4FY26 (जनवरी-मार्च): 4.0%
Q1FY27 (अप्रैल-जून): 4.5%
जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में सुधार
गवर्नर ने कहा कि अर्थव्यवस्था अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। चालू वित्त वर्ष (FY26) के लिए GDP Growth Estimate अब 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया गया है।
Q2FY26: 7.0% (पहले 6.7%)
Q3FY26: 6.4% (पहले 6.6%)
Q4FY26: 6.2% (पहले 6.3%)
Q1FY27: 6.4% (पहले 6.6%)
रुपये की स्थिति और लोन ग्रोथ
गवर्नर ने कहा कि रुपये की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बैंकिंग सिस्टम की तरलता स्थिति आरामदायक बनी हुई है और अगस्त से औसत दैनिक लिक्विडिटी 2.1 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष स्तर पर है।
उन्होंने बताया कि बैंक लोन ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और एनबीएफसी (NBFC) भी बेहतर संकेतक दिखा रहे हैं।
कुल मिलाकर, RBI का संदेश साफ है—नीतिगत स्थिरता बनाए रखते हुए महंगाई को नियंत्रित करना और ग्रोथ को सपोर्ट करना ही फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है।





