सीजी भास्कर 30 सितम्बर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने Reliance Infra ED Raids के तहत शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की. अनिल अंबानी से जुड़ी Reliance Infrastructure (रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर) के कई परिसरों पर एक साथ छापेमारी की गई. यह छापे मुंबई और इंदौर में 6 अलग-अलग जगहों पर पड़े, जो सीधे तौर पर कथित विदेशी फंड ट्रांसफर और FEMA उल्लंघन से जुड़े मामले से संबंधित बताए जा रहे हैं.
पूछताछ और बयान
इससे पहले, अगस्त में अनिल अंबानी से Reliance Infra ED Raids मामले को लेकर 10 घंटे तक लंबी पूछताछ की गई थी. सुबह 11 बजे से लेकर रात 9 बजे तक चली इस पूछताछ में अंबानी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्होंने या उनकी कंपनियों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं की है. उनके मुताबिक, कंपनी के सभी वित्तीय निर्णय (financial decisions) वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमानुसार लिए गए थे और सभी खुलासे नियामक संस्थाओं के समक्ष समय पर किए गए थे.
फर्जी गारंटी और गिरफ्तारी
इसी मामले से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा तब सामने आया जब ओडिशा स्थित एक कंपनी के एमडी पार्थ सारथी बिस्वाल को गिरफ्तार किया गया. उन पर आरोप है कि उन्होंने अंबानी समूह की एक कंपनी के लिए लगभग 68 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी उपलब्ध कराई थी. यह गिरफ्तारी Reliance Infra ED Raids का अहम हिस्सा मानी जा रही है.
हजारों करोड़ का हेरफेर
जांच एजेंसी के मुताबिक, अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के खिलाफ मामला सिर्फ फर्जी गारंटी तक सीमित नहीं है. एजेंसी का मानना है कि समूह की कई कंपनियों द्वारा 17,000 करोड़ रुपये से अधिक के ग्रुप लोन में कथित वित्तीय अनियमितताएं (financial irregularities) की गई हैं. Reliance Infra ED Raids इन्हीं गड़बड़ियों की परतें खोलने के लिए तेज की गई हैं.
अनिल अंबानी का पक्ष
पूछताछ के दौरान अंबानी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी कंपनियों ने हमेशा नियमों का पालन किया है. उन्होंने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और Reliance Infra ED Raids से कोई भी गड़बड़ी साबित नहीं होगी. हालांकि, एजेंसी की जांच फिलहाल जारी है और आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.


