रायपुर। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए सरकार ने Religious Tourism Development Roadmap पर काम तेज कर दिया है। इस पहल के तहत राज्यभर के मंदिरों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। जिलों से मंदिरों की वर्तमान स्थिति, पहुंच मार्ग, श्रद्धालुओं की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी सूचनाएं मांगी गई हैं, ताकि विकास की दिशा तथ्यात्मक आधार पर तय की जा सके।
जरूरत के हिसाब से होगा जीर्णोद्धार
एकत्रित रिपोर्ट के आधार पर मंदिरों की संरचनात्मक स्थिति, मूलभूत सुविधाओं और भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा। इसके बाद Temple Infrastructure Planning के तहत जीर्णोद्धार और विस्तार का चरणबद्ध रोडमैप तैयार होगा। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित धार्मिक अनुभव मिले, वहीं स्थानीय रोजगार और पर्यटन गतिविधियों को भी बल मिले।
राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूत दावेदारी
सरकार की मंशा छत्तीसगढ़ को Chhattisgarh Religious Tourism के रूप में राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की है। इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग से प्रमुख मंदिरों को चिन्हित कर उन्हें धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा। सड़क, पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और ठहरने जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा।
महामाया धाम होगा नए रूप में विकसित
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित प्राचीन महामाया देवी मंदिर को Ratanpur Corridor Project के तहत विशेष पहचान देने की तैयारी है। काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर विकास के लिए केंद्र को 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। इसी मॉडल पर दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी और चंद्रपुर के चंद्रहासिनी मंदिर के लिए भी सहयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
जनभागीदारी से आएंगे प्रस्ताव
धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के अनुसार मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए आमजन, संस्थाएं और मंदिर समितियां भी प्रस्ताव दे सकेंगी। इन प्रस्तावों का तकनीकी और आवश्यकता आधारित परीक्षण कलेक्टर स्तर पर होगा, जिसके बाद शासन से अनुदान स्वीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था शहरी और ग्रामीण—दोनों क्षेत्रों के मंदिरों पर समान रूप से लागू होगी।
72 प्रमुख शासकीय मंदिर फोकस में
प्रदेश में सरकार के नियंत्रण वाले 72 प्रमुख शासकीय मंदिरों को इस योजना का केंद्र बनाया गया है। इनमें रायगढ़, सारंगढ़, बिलाईगढ़, कबीरधाम, बेमेतरा, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जैसे जिले शामिल हैं। विध्यांवासिनी, दंतेश्वरी, बूढ़ा महादेव और जगन्नाथ जैसे मंदिरों के समग्र विकास से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।


