सीजी भास्कर 26 जनवरी। उत्तर बस्तर के कांकेर जिले में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने एक नई मिसाल कायम की। नरहरदेव स्कूल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में पहली बार घुड़सवारों का विशेष दल परेड में शामिल (Republic Day Kanker) हुआ। इस दल की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल छह युवा वे थे, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था, लेकिन आज वे मुख्यधारा में लौटकर राष्ट्र के सम्मान में परेड करते नजर आए।
मुख्य अतिथि सांसद भोजराज नाग ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। इसके बाद जैसे ही हॉर्स राइडर्स का दल मैदान में उतरा, पूरा वातावरण तालियों और जयकारों से गूंज उठा। प्रशिक्षित घोड़ों पर सवार युवाओं ने संतुलन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ ऐसे स्टंट दिखाए, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया।
इन युवाओं की कहानी परेड से कहीं ज्यादा गहरी है। कभी बंदूक थामने वाले ये पूर्व नक्सली केवल 15 दिनों के कठिन प्रशिक्षण में घुड़सवारी और परेड की बारीकियां सीखकर मैदान (Republic Day Kanker) में उतरे। सीमित समय, कठिन अभ्यास और अनुशासन के बीच उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही दिशा और अवसर मिलने पर बदलाव संभव है।
गणतंत्र दिवस समारोह में यह दृश्य केवल एक आकर्षण नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि बस्तर अब बदलाव के रास्ते पर है। हिंसा की पहचान से निकलकर विश्वास, पुनर्वास और राष्ट्र निर्माण की ओर बढ़ते कदम अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगे हैं।
स्थानीय लोगों के लिए यह पल भावुक करने वाला रहा। जिन हाथों से कभी भय की कहानियां जुड़ी थीं, आज वही हाथ राष्ट्रध्वज को सलामी (Republic Day Kanker) देते दिखे। परेड के हर चक्कर के साथ यह अहसास गहराता गया कि गणतंत्र केवल संविधान की किताब नहीं, बल्कि बदलाव का अवसर भी है।
इस ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस ने कांकेर को केवल एक आयोजन की पहचान नहीं दी, बल्कि यह दिखाया कि जब व्यवस्था, विश्वास और पुनर्वास एक साथ चलते हैं, तो अंधेरे से निकलकर रोशनी की ओर बढ़ना मुमकिन हो जाता है।




