सीजी भास्कर, 6 जनवरी। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने रियल एस्टेट परियोजनाओं (RERA Action) में नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए रायपुर स्थित “वॉलफोर्ट एलेन्सिया” परियोजना के प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत की गई है।
रेरा (RERA Action) में प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि परियोजना का विकास नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप नहीं किया गया। जांच में पाया गया कि स्वीकृत नक्शे से हटकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया है। यह कृत्य रेरा अधिनियम की धारा 14(1) का सीधा उल्लंघन माना गया।
रेरा (RERA Action) अधिनियम की धारा 14(1) के अनुसार किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विकास सक्षम प्राधिकरणों द्वारा स्वीकृत ले-आउट, रेखांकन और विनिर्देशों के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य है। बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार का परिवर्तन कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
प्राधिकरण ने यह भी संज्ञान लिया कि वर्तमान में उक्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उपयोग परियोजना में रह रहे आबंटितियों द्वारा किया जा रहा है। आबंटितियों की सुविधा और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर एसटीपी को तोड़ने या पुनर्निर्माण का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। हालांकि, ले-आउट से विचलन को हल्के में नहीं लिया गया।
रेरा ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्वीकृत ले-आउट से हटकर किया गया निर्माण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे परियोजना की पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के अधिकारों पर भी असर पड़ता है। इसी आधार पर प्रमोटर को दोषी ठहराते हुए 10 लाख रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया।
छत्तीसगढ़ रेरा ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी परियोजना में बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के स्वीकृत योजनाओं से विचलन पाया गया, तो और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बनी रहे और घर खरीदारों के हितों की पूरी तरह से रक्षा हो।
स्वीकृत ले-आउट से विचलन पर कार्रवाई
रेरा (RERA Action) की जांच में सामने आया कि वॉलफोर्ट एलेन्सिया परियोजना में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत ले-आउट से हटकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया। इसे रेरा अधिनियम की धारा 14(1) का उल्लंघन मानते हुए प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।


