सीजी भास्कर, 2 सितंबर : उड़ीसा के मलकानगिरी जिले के मटेर गांव निवासी सोढ़ी हिड़मा रविवार रात शबरी नदी में हादसे का शिकार हो गया। तेलावर्ती गांव के पास नाव पलटने के बाद हिड़मा 16 घंटे तक झाड़ियों और पेड़ की टहनियों का सहारा लेकर डटा रहा। सुबह ग्रामीणों ने उसकी आवाज सुनी और प्रशासन को सूचना दी। पुलिस, प्रशासन और सीआरपीएफ ने लगातार प्रयास किए, लेकिन तेज बहाव और पत्थरों के बीच पहुंचना मुश्किल था। अंततः हेलीकॉप्टर रेस्क्यू (Helicopter Rescue) कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया।
हिड़मा पेशे से नाव चलाता था और तैराकी जानता था। रविवार रात करीब 8 बजे जब वह घर लौट रहा था तभी अचानक नदी के तेज बहाव में नाव पलट गई। उसने डूबने से बचने के लिए पास की झाड़ी को पकड़ा और रातभर उसी पर डटा रहा। सुबह मछली पकड़ने पहुंचे ग्रामीणों ने मदद की आवाज सुनी। सूचना पर प्रशासन की टीम सुबह 8 बजे मौके पर पहुंची। नगर सैनिकों ने नाव और रस्सी का उपयोग कर बचाने की कोशिश की, लेकिन बहाव तेज होने के कारण सफलता नहीं मिली।
इसके बाद जगदलपुर से सेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर बुलाया गया। दोपहर 2 बजे हेलीकॉप्टर पहुंचा और जवान रस्सी के सहारे नीचे उतरकर हिड़मा को सुरक्षित बाहर लेकर आए। जिला अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है और स्थिति अब बेहतर बताई जा रही है। इस दौरान मौके पर एएसपी अभिषेक वर्मा, एसडीओपी परमेश्वर तिलकवार, तहसीलदार अंबर गुप्ता, थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी, सीआरपीएफ और नगर सैनिक मौजूद रहे। यह घटना प्रशासनिक तत्परता और संघर्ष (Survival Struggle) का बेहतरीन उदाहरण है। ग्रामीण और प्रशासन के प्रयासों ने मिलकर जीवन बचाने में सफलता दिलाई।


