गरियाबंद। धान खरीदी का सीजन खत्म होते ही जिले के संग्रहण केंद्रों में Rice Procurement Irregularities Gariaband को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। नियम के मुताबिक 24 घंटे में दी जाने वाली ट्रकों की पावती 10 से 15 दिन बाद भी कई केंद्रों को नहीं मिली है, जिससे खरीदी प्रभारियों में बेचैनी बढ़ती जा रही है, वहीं पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
देवभोग और गोहरापदर ब्रांच से भेजे गए ट्रकों का अता-पता नहीं
देवभोग और गोहरापदर ब्रांच के अंतर्गत आने वाले कुल 22 खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्र कुंडेल भेजे गए करीब 600 ट्रक धान की रिसीविंग अब तक पेंडिंग है। देवभोग ब्रांच मैनेजर अमर सिंह ध्रुव ने उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर बताया कि केवल उनके ब्रांच से जुड़े 10 केंद्रों के 362 ट्रकों की पावती नहीं आई है, जबकि परिवहन पूरा हो चुका है। यह स्थिति (Paddy Transport Delay) जैसी समस्या को उजागर करती है।
कुंडेल संग्रहण केंद्र में ऑनलाइन एंट्री का संकट
जिले के एकमात्र धान संग्रहण केंद्र कुंडेल में एंट्री कार्य की धीमी रफ्तार अब गंभीर मुद्दा बन चुकी है। प्रभारी जगमोहन साहू ने माना कि पहले 1300 ट्रकों की एंट्री लंबित थी, जो अब घटकर आधी रह गई है। पहले मोबाइल नेटवर्क और बिजली बाधित रहने से ऑनलाइन एंट्री प्रभावित हो रही थी, अब वाई-फाई और इनवर्टर की व्यवस्था के बाद काम तेज करने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद (Online Entry Pending) की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
सूखत के नाम पर समितियों पर आर्थिक दबाव
पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि पावती और वास्तविक वजन में अंतर आने पर खरीदी केंद्रों से सूखत के नाम पर बड़ी रकम वसूली जाती रही है। देवभोग क्षेत्र में पिछले सीजन हजारों क्विंटल धान को सूखत बताकर समितियों से करोड़ों की भरपाई कराई गई थी। इस प्रक्रिया में कई खरीदी प्रभारी मानसिक और आर्थिक दबाव झेलते हैं, क्योंकि रिसीविंग और उठाव के बीच का अंतर उनके सिर मढ़ दिया जाता है।
वजन में अंतर और धर्मकांटा विवाद
देवभोग और गोहरापदर से कुंडेल संग्रहण केंद्र की दूरी 100 किलोमीटर से अधिक है। रास्ते में मान्य धर्मकांटा न होने के कारण संग्रहण केंद्र में हुए वजन को ही अंतिम माना जाता है। कई बार पावती में कम वजन दिखाकर खरीदी प्रभारियों को तलब किया जाता है, फिर कथित तौर पर “सेटिंग” के जरिए मामला सुलझाया जाता है। यही कारण है कि (Weight Manipulation in Paddy Procurement) जैसे शब्द अब स्थानीय चर्चाओं का हिस्सा बन चुके हैं।
कवर्धा के मुसवा कांड की गूंज गरियाबंद तक
कवर्धा में संग्रहण केंद्र की गड़बड़ियों को चूहे के नुकसान का हवाला देकर दबाने की कोशिश ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए थे। अब गरियाबंद में भी वैसी ही आशंका जताई जा रही है कि कहीं पावती पेंडिंग रखकर किसी बड़ी कमी को छुपाया तो नहीं जा रहा। हाल ही में डीएमओ को हटाए जाने के पीछे भी लोग किसी बड़े खुलासे की अटकलें लगा रहे हैं। यदि भौतिक सत्यापन हुआ, तो कई परतें खुल सकती हैं।
किसानों और समितियों में बढ़ती बेचैनी
धान की पावती समय पर न मिलने से खरीदी केंद्रों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। एक तरफ किसानों को भुगतान का भरोसा देना, दूसरी ओर रिकॉर्ड में एंट्री न होने से जवाबदेही का डर, दोनों के बीच समितियां फंसी हुई हैं। अधिकारी जल्द समाधान का भरोसा दे रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक Rice Procurement Irregularities Gariaband जैसे सवाल उठते रहेंगे।






