सीजी भास्कर, 11 नवंबर। राज्य से निकलने वाली नदियों (River conservation Chhattisgarh) के उद्गम स्थल आखिर क्यों सूख रहे हैं, यह जानने और इन स्थलों को तलाशने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। साथ ही प्रदेश की (River revival plan) 10 प्रमुख नदियों के संरक्षण और संवर्धन पर यह कमेटी काम करेगी। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी नदियों और उनके उद्गम स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। वर्तमान में ये स्थान राजस्व अभिलेखों में नालों के रूप में दर्ज हैं।
शासन की ओर से सोमवार को हाई कोर्ट में दायर जवाब में बताया गया कि सात नदियों अरपा, महानदी, हसदेव, तांदूला, पैरी, केलो और मांड के लिए पहले ही कमेटी गठित की जा चुकी है। हाई कोर्ट ने अब कोरबा की लीलागर, पेण्ड्रा की सोनभद्र और तिपान नदी को भी संरक्षण सूची में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। अरपा नदी के साथ ही प्रदेश की अन्य नदियों के पुनर्जीवन की मांग करते हुए दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अरपा में सालभर पानी बहाने की योजना के साथ 10 प्रमुख नदियों के (River rejuvenation project) पर काम शुरू किया गया है।
इतिहासकार, लेखक और पर्यावरणविद होंगे कमेटी में
हाई कोर्ट ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थल सूखने के कारणों को जानने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए राज्य सरकार विशेषज्ञों की कमेटी गठित करे। शासन ने सहमति जताते हुए कहा कि इस कमेटी में तकनीकी अधिकारी, इतिहासकार, लेखक और पर्यावरणविद शामिल किए जाएंगे। कमेटी का पहला कार्य होगा नदियों के उद्गम स्थलों की पहचान और पुनर्स्थापना करना। शासन के अनुसार, जिन जिलों से नदियां निकलती हैं वहां के कलेक्टर इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे, जबकि खनिज, वन और जिला पंचायत विभाग के अधिकारी सदस्य रहेंगे।
(River conservation Chhattisgarh) प्रदेश से निकलती हैं 19 नदियां
याचिकाकर्ता अरविंद शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ से कुल 19 छोटी-बड़ी नदियां निकलती हैं। इनमें प्रमुख रूप से महानदी (सिहावा, धमतरी), शिवनाथ (अंबागढ़, राजनांदगांव), हसदेव (रामगढ़, मनेन्द्रगढ़), तांदुला (भानुप्रतापपुर), पैरी (बिन्द्रानवागढ़), केलो (रायगढ़), ईब (जशपुर), मांड (मैनपाट) और कोटरी (दुर्ग) जैसी नदियां शामिल हैं। इन सभी के उद्गम क्षेत्रों का संरक्षण अब इस कमेटी के दायरे में आएगा।
गंदे पानी को रोकने निगम ने पेश किया शपथ पत्र
सोमवार को सुनवाई के दौरान बिलासपुर नगर निगम की ओर से भी एक शपथ पत्र पेश किया गया। इससे पहले हाई कोर्ट ने पूछा था कि अरपा नदी में गिरने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए बनाई गई (STP project Bilaspur) कार्ययोजना का क्या हाल है। निगम ने बताया कि 103 करोड़ रुपये की योजना के तहत नदी में गिरने वाले पानी की सफाई के लिए चार एसटीपी बनाए जा रहे हैं । दो मंगला में और एक-एक कोनी व जवाली नाले पर। ये निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा चिंगराजपारा, तिलकनगर और शनिचरी क्षेत्र में तीन नए एसटीपी भी प्रस्तावित किए गए हैं। दिसंबर तक दो मुख्य एसटीपी शुरू हो जाएंगे। पहले से ही चिल्हाटी और दोमुहानी में बने एसटीपी के जरिए गंदे पानी की सफाई की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि अगले वर्ष तक अरपा में प्रदूषित जल का बहाव पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकेगा।
अरपा नदी संरक्षण पर हाई कोर्ट सख्त
हाई कोर्ट ने अरपा नदी में प्रदूषण रोकने के लिए नगर निगम को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि निर्धारित समय में एसटीपी पूरे नहीं हुए, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नदियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू की जा रही इस पहल से छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख जल-संवर्धन राज्यों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भू-जल स्तर भी सुधरेगा और नदी तंत्र को स्थायित्व मिलेगा।


