सीजी भास्कर, 24 जनवरी | Road Safety Month Controversy : छत्तीसगढ़ में चल रहे सड़क सुरक्षा माह के बीच दुर्ग जिले से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव शुक्रवार को शहर की सड़कों पर बिना हेलमेट बाइक चलाते नजर आए। खास बात यह रही कि यह कोई छुपी हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसका वीडियो उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर साझा किया।
मंत्री का वीडियो और बढ़ता विवाद
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोग पूछने लगे कि जब आम नागरिकों से ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है, तो क्या जनप्रतिनिधि इन नियमों से ऊपर हैं? कई यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा कि हेलमेट पहनने से शायद “बाहुबली” वाला अंदाज़ कैमरे में नहीं आ पाता।
आम लोगों पर चालान, खास लोगों पर चुप्पी
दुर्ग में रोज़ाना ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर चालान काटे जा रहे हैं। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और गलत पार्किंग पर पुलिस की कार्रवाई आम बात है। ऐसे में एक मंत्री का खुलेआम बिना हेलमेट बाइक चलाना और उस पर कोई तत्काल कार्रवाई न होना, सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने नाराज़गी जताते हुए लिखा कि नियम अगर सबके लिए बराबर हैं, तो कार्रवाई भी बराबर होनी चाहिए। कुछ यूजर्स ने यहां तक कहा कि सड़क सुरक्षा माह का मकसद तभी पूरा होगा, जब इसकी शुरुआत ऊपर से हो, न कि सिर्फ आम लोगों से।
प्रतीकात्मक नहीं, व्यवहारिक हो सुरक्षा संदेश
सड़क सुरक्षा अभियान का उद्देश्य सिर्फ पोस्टर, नारे और अभियान तक सीमित नहीं है। जब जनप्रतिनिधि खुद नियमों का पालन करते दिखें, तभी संदेश समाज तक असरदार तरीके से पहुंचता है। वरना ऐसे वीडियो पूरे अभियान को मज़ाक बना देते हैं और जनता का भरोसा कमजोर करते हैं।


