RSS Smriti Mandir Nagpur Visit : महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में उस वक्त एक अलग ही संदेश देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नागपुर के रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और पूर्व सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
शीतकालीन सत्र के बीच स्मृति मंदिर दौरा
यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र नागपुर में चल रहा है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, विधान परिषद के सभापति राम शिंदे सहित बीजेपी और शिवसेना के कई मंत्री और विधायक भी स्मृति मंदिर पहुंचे।
अजित पवार और NCP विधायकों की दूरी पर नजरें
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अजित पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के किसी भी विधायक की मौजूदगी नहीं दिखी। यह पहला मौका नहीं है—पिछले वर्ष भी इसी तरह के दौरे में अजित पवार शामिल नहीं हुए थे। राजनीतिक गलियारों में इसे गठबंधन के भीतर वैचारिक भिन्नता से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘यहां आना मेरी परंपरा है’—एकनाथ शिंदे
श्रद्धांजलि के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि नागपुर आने पर स्मृति मंदिर जाना उनकी निजी परंपरा है। उन्होंने कहा कि यहां आने से देशभक्ति की भावना जागृत होती है और समाज सेवा के लिए नई ऊर्जा मिलती है। शिंदे ने नागपुर को संघ की जन्मभूमि बताते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी जोर दिया।
RSS के 100 साल और विचारधारा की भूमिका
शिंदे ने यह भी उल्लेख किया कि RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा केवल संगठन तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने में इसकी भूमिका रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए संघ से मिली प्रेरणा का जिक्र किया।
मंत्रियों ने बताया स्मृति मंदिर को प्रेरणा का केंद्र
कार्यक्रम में मौजूद मंत्री पंकज राजेश भोयर ने कहा कि स्मृति मंदिर केवल एक स्थल नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। वहीं महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष चित्रा किशोर वाघ ने कहा कि यहां से संगठन और जनता के लिए काम करने की दिशा मिलती है।
राजनीतिक संकेतों से भी जुड़ा रहा दौरा
हालांकि यह कार्यक्रम श्रद्धांजलि और वैचारिक सम्मान से जुड़ा था, लेकिन अजित पवार की अनुपस्थिति और गठबंधन के अलग-अलग घटकों की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक संकेतों से भी जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में इसके मायने महाराष्ट्र की राजनीति में कैसे दिखते हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।





