RTE Fee Refund Case : शिक्षा का अधिकार कानून के तहत चयनित बच्चे से फीस वसूलने के मामले में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। शंकर नगर स्थित सीपीएस किड्स एकेडमी को निर्देश दिया गया है कि अभिभावक से ली गई पूरी राशि लौटाई जाए और बच्चे का दाखिला आरटीई कोटे में समायोजित किया जाए। आयोग का कहना है कि आरटीई चयन होने के बाद किसी भी तरह की फीस लेना कानून के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
लॉटरी में नाम आया, फिर भी सामान्य कोटे में दाखिला
गणेश नगर निवासी तोसूराम साहू ने आयोग के सामने शिकायत रखी थी कि उनके बेटे रियांश साहू का चयन मार्च 2025 में आरटीई की पहली लॉटरी में हो चुका था। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन और नोडल अधिकारी की ओर से जरूरी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई। अभिभावक का कहना है कि सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण मजबूरी में उन्हें सामान्य श्रेणी में प्रवेश कराना पड़ा।
दो किस्तों में वसूले 16 हजार, अब लौटानी होगी पूरी रकम
प्रवेश के दौरान स्कूल ने दो किस्तों में कुल 16 हजार रुपए शुल्क के रूप में वसूले। आयोग ने इस वसूली को अनुचित बताते हुए कहा कि आरटीई के तहत चयनित बच्चे से लिया गया पैसा तुरंत वापस किया जाए। साथ ही, स्कूल को निर्देश दिए गए हैं कि वह शासन से निर्धारित प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया पूरी करे, ताकि अभिभावक पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।
भविष्य के लिए चेतावनी, निगरानी बढ़ाने के संकेत
आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल राशि वापसी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आगे से किसी भी आरटीई चयनित छात्र के साथ नियमों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। शिक्षा विभाग को भी संकेत दिए गए हैं कि नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और अभिभावकों को सही जानकारी समय पर मिले। इससे स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी और बच्चों का अधिकार सुरक्षित रहेगा।






