RTE Student Labour Case: छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत पढ़ने वाले छात्रों से श्रम कराए जाने के आरोपों पर Chhattisgarh High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने मामले में स्कूल शिक्षा सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है। अदालत ने इसे गंभीर बताते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है—इसे (Chhattisgarh High Court Action) के रूप में देखा जा रहा है।
निर्माण और पुताई कार्य कराने का आरोप
आरोप है कि Surajpur जिले के एक निजी विद्यालय में आरटीई छात्रों से सीमेंट-रेत मिलवाकर निर्माण कार्य कराया गया और कक्षाओं की पुताई भी कराई गई। परिजनों का दावा है कि मना करने पर छात्रों को टीसी काटने की धमकी दी गई। बच्चों के काम करते हुए फोटो और वीडियो प्रशासन को सौंपे जाने की बात भी सामने आई है—जिसे (Right to Education Violation) के तौर पर उठाया जा रहा है।
जांच समिति गठित, सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति पहले ही गठित की जा चुकी है। अदालत ने कहा कि जांच की प्रगति और निष्कर्ष शपथपत्र में स्पष्ट किए जाएं। इस संदर्भ में (Education Department Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
प्राचार्य के व्यवहार पर भी सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि शिकायत लेकर स्कूल पहुंचने पर प्राचार्य ने अभद्र व्यवहार किया और यह तर्क दिया कि छात्रों को मुफ्त सुविधाएं मिल रही हैं। साथ ही एक कक्षा के निजी उपयोग का आरोप भी सामने आया है। इन बिंदुओं पर भी अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा है—इसे (Surajpur School Controversy) के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
रायगढ़ छात्रावास प्रकरण भी जुड़ा
इसी तरह Raigarh के एक प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में छात्राओं से रंगाई-पुताई और सफाई कराने का मामला भी चर्चा में है। संबंधित प्रकरण में एक कर्मचारी को निलंबित किया गया है। अदालत ने दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई का संकेत दिया है।
तय तिथि तक विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि तक राज्य शासन विस्तृत जानकारी और साक्ष्यों सहित शपथपत्र पेश करे। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए, तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और बच्चों के अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया है।





