सीजी भास्कर, 24 मार्च। राजनीति के शोर-शराबे के बीच एक ऐसी खबर आई, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध (Rupesh Thakur Demise) कर दिया। बलौदाबाजार के युवा और सक्रिय कांग्रेस नेता रूपेश ठाकुर अब इस दुनिया में नहीं रहे। असम के Guwahati में चुनावी गतिविधियों के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा, और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया। यह घटना इतनी अप्रत्याशित थी कि साथ मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। खबर फैलते ही छत्तीसगढ़ में उनके समर्थकों के बीच सन्नाटा पसर गया।
जमीन से जुड़े नेता, जिनकी पहचान लोगों से थी
रूपेश ठाकुर सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा नहीं थे, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय एक ऐसे नेता थे जिनकी पहचान आम लोगों से उनके सीधे जुड़ाव से बनी। वे तीन बार पार्षद चुने गए और संगठन में लगातार सक्रिय रहे। Indian National Congress के भीतर उन्होंने ब्लॉक स्तर से लेकर कई जिम्मेदारियां संभालीं और युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी खास पकड़ मानी जाती थी।
प्रचार के दौरान बिगड़ी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, वे असम में चुनाव प्रचार के सिलसिले (Rupesh Thakur Demise) में पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक तबीयत बिगड़ी और हार्ट अटैक ने उनकी जिंदगी छीन ली। चुनावी मंच, जो आमतौर पर जोश और नारों से गूंजता है, वहीं इस घटना के बाद कुछ पल के लिए खामोशी में बदल गया।
अंतिम यात्रा की तैयारी, नेताओं का पहुंचना जारी
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता Guwahati पहुंच रहे हैं। उनके पार्थिव शरीर को जल्द ही बलौदाबाजार लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार से पहले लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिलेगा।
अधूरी रह गई एक राजनीतिक यात्रा
रूपेश ठाकुर को कांग्रेस के उभरते चेहरों में गिना जाता था। कम समय में उन्होंने जो पहचान बनाई, वह उनकी सक्रियता और मेहनत का परिणाम थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हमेशा लोगों के बीच रहते थे-चाहे समस्या छोटी हो या बड़ी, वे तुरंत पहुंचने वाले नेताओं में शामिल थे।
शोक में डूबा बलौदाबाजार
उनके निधन के बाद पूरे क्षेत्र में गम का माहौल है। कार्यकर्ता, समर्थक और आम लोग सभी स्तब्ध (Rupesh Thakur Demise) हैं। कई जगहों पर श्रद्धांजलि सभाओं की तैयारी शुरू हो गई है। राजनीति में अक्सर नए चेहरे उभरते हैं, लेकिन कुछ लोग अपनी सादगी और जुड़ाव से अलग पहचान छोड़ जाते हैं – रूपेश ठाकुर उन्हीं में से एक थे।


