सीजी भास्कर, 29 सितंबर। पूर्व सांसद और सामाजिक-राजनीतिक हस्ती साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने रविवार को भोपाल में आयोजित दुर्गा वाहिनी के कार्यक्रम में दिए गए बयानों के बाद तीखी सार्वजनिक चर्चा और आलोचना (Sadhvi Pragya Statement) का केंद्र बन गईं। उनके कथित बयान में कहा गया कि यदि मंदिर के पास प्रसाद बेचते हुए कोई ‘विधर्मी’ (गैर-हिंदू) पाया जाए तो “उसे जितना संभव हो, पीटो और बाद में कानून के हवाले करो” – इस प्रकार के सुझाव सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंताएँ पैदा कर रहे हैं।
साध्वी प्रज्ञा ने रैली के मंच से यह भी कहा कि जब “दुश्मन” घर की दहलीज़ पार करने का प्रयास करे तो उन्हें रोका जाना चाहिए और हर घर में सुरक्षा के लिए हथियार रखने की अपील की – ऐसे विचारों ने कई विपक्षी नेताओं, नागरिक समूहों और आम लोगों में चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर कुछ नेताओं ने इनके बयान (Sadhvi Pragya Statement) को उकसावे भरा और कानून की सीमाओं के विनाश का इशारा करने वाला बताया।
बयान के सार्वजनिक होते ही राज्य और केंद्र के कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों ने निंदा करते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के खिलाफ हिंसा की अपील अस्वीकार्य है और इससे सामाजिक शान्ति को गंभीर जोखिम हो सकता है। कई कानूनी विशेषज्ञों ने भी मीडिया (Sadhvi Pragya Statement) से कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी समुदाय के लोगों के विरुद्ध हिंसा को उकसाना भारतीय दंड-संहिता की धाराओं के दायरे में आ सकता है और आवश्यक हो तो संबंधित प्राधिकरणों द्वारा शासकीय कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है और कहा गया है कि किसी भी तरह की अराजकता या सामुदायिक टकराव को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। घटना के बाद सामाजिक-धर्मनिरपेक्ष समूहों ने शांति के आह्वान के साथ-साथ मंत्रीस्तरीय हस्तक्षेप की भी अपील की है ताकि भावनाएँ शांत रहें और कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित हो।


