भिलाई। शिक्षा के उजियारे को फैलाने वाले उन नायकों की याद में आज एक भावनात्मक क्षण देखने को मिला, जब (Saksharta Mitra Manch) के मंच पर 90 के दशक के साक्षरता अभियान में योगदान देने वाले दिवंगत सेवियों को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में उन स्वयंसेवकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने साक्षरता अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया। इस अवसर पर रिसाली नगर पालिक निगम की महापौर शशि सिन्हा, भिलाई-चरोदा नगर निगम के महापौर निर्मल कोसरे, और पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. बी. एल. तिवारी की उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया।
तीन दशक पुराने अनुभवों ने जगाई यादें
कार्यक्रम के आरंभिक सत्र में 30 वर्ष पूर्व एक साथ कार्य करने वाले साक्षरता सेवियों ने अपने अनुभव साझा किए। उनके शब्दों में वही ऊर्जा और समर्पण झलक रहा था जिसने एक समय में हजारों लोगों को (literacy campaign) से जोड़ा था।
कला जत्था के कलाकारों ने प्रेरणा गीतों से माहौल को भावनात्मक बना दिया। कवि शरद कोकास और कवयित्री शशि दुबे ने साक्षरता और समाज परिवर्तन पर अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। इसी बीच मणिमय मुखर्जी ने पुराने अभियान के गीतों के मुखड़े सुनाकर श्रोताओं को समय के उस दौर में ले गए।

लोकगीतों से गूंजा सभागार
इस अवसर पर प्रसिद्ध कर्मा गायक घनश्याम सिंह ठाकुर ने स्वर्गीय कोदूराम वर्मा द्वारा रचित गीत प्रस्तुत किया। गीतों की धुन पर उपस्थित लोग झूम उठे।
आयोजन के दौरान साक्षरता की विरासत से जुड़े 43 श्रेष्ठ कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री शमशाद बेगम, पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर, डॉ. परदेशी राम वर्मा, डॉ. शैल वर्मा, पुन्नू यादव, डॉ. चुन्नी लाल शर्मा, प्रशांत पांडे, मोहित शर्मा, प्रभा सुधाकर, रतन साहू, टिकेश्वरी देशमुख, दिनेश सिंह, रामकुमार वर्मा, अमरीश परगनिहा, और कई अन्य शामिल थे।

जन-आंदोलन को मिली नई दिशा
महापौर निर्मल कोसरे ने स्वयं भी साक्षरता कक्षा संचालित करने के अनुभव साझा किए और कहा कि निरक्षरता मिटाने की यह यात्रा आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने वादा किया कि अगला (Saksharta awareness event) उनके क्षेत्र में पूर्ण सहयोग के साथ आयोजित किया जाएगा।
वहीं, महापौर शशि सिन्हा ने कहा कि निस्वार्थ भावना से किया गया कोई भी कार्य समाज के लिए प्रेरणा बनता है। उन्होंने सभी सम्मानित कार्यकर्ताओं को बधाई दी और साक्षरता मिशन को जीवन का उत्सव बताया।

नयी पीढ़ी को मिली प्रेरणा
इस अवसर पर डॉ. हरिनारायण दुबे, डॉ. संध्या मदन मोहन, ज्ञान चंद जैन, शरद शर्मा, पुनीत चौबे, डॉ. अजय तिवारी, डॉ. पी.आर. मंगवानी, महेश चतुर्वेदी, डॉ. रजनी नेल्सन, प्रेमलता हुसैन, प्रीति बेहरा, रत्ना नामदेव सहित दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों से आए 120 से अधिक प्रतिभागियों ने उपस्थिति दर्ज कराई।
उनके अनुसार, यह आयोजन सिर्फ स्मरण का नहीं बल्कि (lifelong literacy movement) को आगे बढ़ाने का संदेश था।
अंत में भावनाओं से भरा समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी ने दिवंगत सेवियों के योगदान को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा। मंच से निकला यह संदेश साफ था — साक्षरता सिर्फ अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की प्रेरणा है।


