संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले की डेमोग्राफी पर आई नई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में हिंदुओं की आबादी अब सिर्फ 15 प्रतिशत रह गई है। बाकी लोग पलायन कर चुके हैं। आज़ादी के समय यानी 1947 में संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत थी, लेकिन धीरे-धीरे यहां की जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल गई।
हिंसा के बाद बनी थी जांच आयोग
24 नवंबर 2024 को संभल में मस्जिद सर्वे को लेकर हुई हिंसा के बाद प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। इस आयोग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा, पूर्व IAS अमित मोहन और पूर्व IPS अरविंद कुमार जैन शामिल थे। आयोग ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
जांच रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं।
- दंगों में विदेशी हथियार इस्तेमाल किए गए, जिनमें मेड इन USA हथियार भी मिले।
- रिपोर्ट में लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण और सामाजिक गतिविधियों का जिक्र किया गया है।
- आयोग ने माना कि 1947 से अब तक हुए ज्यादातर दंगों में हिंदू समुदाय को ही निशाना बनाया गया।
- इस बार भी हिंसा की योजना हिंदू मोहल्लों को टारगेट करने की थी, लेकिन पुलिस मौजूदगी के चलते बड़ी जानहानि टल गई।
- रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भीड़ को बाहर से बुलाकर दंगा भड़काया गया था।
सांसद का विवादित बयान
हिंसा से दो दिन पहले, 22 नवंबर को सांसद ज़िया-उर-रहमान बर्क ने नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा था –
“हम सरकार या प्रशासन से दबने वाले नहीं हैं। हम इस देश के मालिक हैं, गुलाम नहीं। मस्जिद थी, मस्जिद है और मस्जिद रहेगी। जिस तरह अयोध्या में मस्जिद छीनी गई, ऐसा यहां नहीं होने देंगे।”
आयोग ने अपने अवलोकन में इस बयान को माहौल भड़काने वाला करार दिया है।


