SBI Cash Fraud Arrest : बिलासपुर जिले की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बिल्हा शाखा में सामने आए 2.06 करोड़ रुपये के गबन ने बैंकिंग सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आंतरिक ऑडिट के दौरान खातों के मिलान में बड़ा अंतर सामने आया, जिसके बाद शाखा प्रबंधन ने दस्तावेज़ों की बारीकी से पड़ताल कराई। शुरुआती जांच में लेन-देन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और एंट्री में हेरफेर की कड़ी पकड़ी गई—यह पूरा प्रकरण (Bank Audit Irregularities) की श्रेणी में आया।
कई खातों में हेरफेर, मिलकर रची गई साजिश
जांच एजेंसी के मुताबिक, कैशियर ने कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर ट्रांजैक्शन स्लिप्स और बैलेंस एंट्री में बदलाव किए। जमा रकम को अलग-अलग खातों में दिखाने, फिर उसे निकालने की रणनीति अपनाई गई, ताकि समय रहते गड़बड़ी पकड़ में न आए। शाखा स्तर पर लंबे समय तक पैटर्न छिपा रहा—इसी वजह से (Record Tampering Case) का दायरा बड़ा होता चला गया।
निलंबन के बाद ‘गायब’, नई पोस्टिंग पर भी नहीं की जॉइनिंग
विभागीय रिपोर्ट मुख्यालय भेजे जाने के बाद आरोपी को निलंबित कर रिजनल बिजनेस ऑफिस, जगदलपुर से अटैच किया गया था। जून 2025 में आदेश जारी होने के बावजूद न तो नई जगह जॉइनिंग हुई, न ही वह शाखा में दिखी। यहीं से तलाश तेज हुई और उसे ट्रैक करने के लिए स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत किया गया—यह कदम (Absconding Accused Tracking) के तहत उठाया गया।
एसीबी की घेराबंदी, बैंक परिसर से गिरफ्तारी
शाखा प्रबंधन की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज कर साक्ष्य जुटाए। मुखबिरों के इनपुट पर गुरुवार को बैंक परिसर में संदिग्ध की मौजूदगी की पुष्टि हुई। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दबिश दी और आरोपी को हिरासत में लिया—ऑपरेशन (ACB Trap Action) के तहत सफल रहा।
कोर्ट में पेशी की तैयारी, रिमांड से खुलेगा पूरा नेटवर्क
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जा रहा है। जांच एजेंसी रिमांड लेकर डिजिटल रिकॉर्ड, डिवाइस लॉग्स और संदिग्ध लेन-देन की परतें खोलने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है—मामला अब (Financial Crime Probe) के निर्णायक मोड़ पर है।






