सीजी भास्कर, 16 सितम्बर। सुबह की प्रार्थना खत्म हुई थी और बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में जाने की तैयारी कर रहे थे। अचानक वहां मौजूद एक महिला शिक्षक (School Corporal Punishment) का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। मासूम छात्र-छात्राएं समझ ही नहीं पाए कि आखिर गलती कहां हो गई। कुछ ही मिनटों में कक्षा का माहौल दहशत में बदल गया।
मामला ओडिशा के मयूरभंज जिले के खंडाडेउला सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय का है। यहां सहायक शिक्षिका सुकांति पर आरोप है कि उन्होंने सुबह की प्रार्थना के बाद बच्चों द्वारा पैर न छूने पर बर्बर पिटाई कर दी। बताया गया कि बांस की छड़ी से की गई मारपीट में 31 छात्रों को चोटें आईं। इनमें से एक छात्र का हाथ टूट गया और एक छात्रा बेहोश होकर अस्पताल पहुंची।
स्कूल प्रबंधन समिति की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर बच्चे प्रार्थना के बाद शिक्षकों (School Corporal Punishment) को पैर छूकर सम्मान देते हैं। लेकिन उस दिन शिक्षिका प्रार्थना समाप्त होने के बाद आईं। नाराज होकर उन्होंने कक्षा छह, सात और आठ के बच्चों को बारी-बारी से पीटना शुरू कर दिया।
घटना की गंभीरता देखते हुए प्रधानाध्यापक पूर्णचंद्र ओझा, खंड शिक्षा अधिकारी बिप्लव कर और अन्य अधिकारियों ने मौके पर जांच की। क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर देवाशीष साहू ने भी बच्चों के बयान लिए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर शिक्षा विभाग ने शिक्षिका सुकांति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
खंड शिक्षा अधिकारी बिप्लव कर ने कहा कि मामला बेहद गंभीर (School Corporal Punishment) था और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को भरोसा दिलाया है कि आगे ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मामला शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब प्राथमिक जिम्मेदारी है। ओडिशा में वर्ष 2004 से शारीरिक दंड पर पूरी तरह प्रतिबंध है, इसके बावजूद इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है।


