सीजी भास्कर, 30 मार्च। बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर (SECL High Court Order 2026) दिया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित को आर्थिक सहायता से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने SECL को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को आवेदन की तिथि से ही सहायता राशि प्रदान की जाए।
कोर्ट ने क्या कहा (SECL High Court Order 2026)
जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के तहत यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या वह चिकित्सकीय रूप से अयोग्य हो जाता है, तो उसके आश्रित को मासिक आर्थिक सहायता देना अनिवार्य है। इस मामले में महिला आश्रित के लिए 6000 रुपये प्रतिमाह सहायता तय है।
क्या था पूरा मामला
याचिकाकर्ता अमरेश राजवाड़े के पिता रामप्रसाद, SECL विश्रामपुर में कार्यरत थे और 2012 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी ने सहायता और रोजगार के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। 2014 में उनका भी निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पूरी तरह संकट में आ गया।
प्रबंधन ने ठुकराया आवेदन
माता-पिता दोनों के निधन के बाद अमरेश ने स्वरोजगार के लिए आवेदन (SECL High Court Order 2026) किया, जिसे SECL प्रबंधन ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के तहत सहायता देना एक स्पष्ट नियम है। ऐसे में इसे अस्वीकार करना पूरी तरह अनुचित और कानून के खिलाफ है।
क्या मिला अंतिम आदेश
कोर्ट ने स्वरोजगार की मांग को तो खारिज किया, लेकिन याचिकाकर्ता को आर्थिक सहायता पाने का अधिकार दिया। साथ ही SECL को निर्देशित किया कि आवेदन की तारीख से ही भुगतान शुरू किया जाए।
क्यों है यह फैसला अहम
यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए राहत का संदेश है, जो कर्मचारी की मृत्यु के बाद आर्थिक असुरक्षा से जूझते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में आश्रित का अधिकार छीना नहीं जा सकता।


