सीजी भास्कर, 28 जनवरी | रायपुर। Sex CD Case Review : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी प्रकरण में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। रायपुर सेशन कोर्ट द्वारा सीबीआई की रिव्यू पिटीशन स्वीकार किए जाने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नियमित रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
सेशन कोर्ट का फैसला: पुराने आदेश पर लगी रोक
24 जनवरी को रायपुर सेशन कोर्ट ने लोअर कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें भूपेश बघेल को साक्ष्यों के अभाव में राहत दी गई थी। सेशन कोर्ट के इस फैसले के साथ ही मामला फिर से शुरुआती चरण में लौट आया है और अब नए सिरे से सुनवाई होगी। (CBI Review Petition)
भूपेश बघेल का रुख: हाई कोर्ट जाने के संकेत
सेशन कोर्ट के आदेश के बाद भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि उन्हें पहले ही इस केस से डिस्चार्ज किया जा चुका था और अब दोबारा कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। बघेल ने भरोसा जताया कि न्यायिक प्रक्रिया में सच्चाई सामने आएगी। (Bhupesh Baghel Case)
पहले मिल चुकी थी राहत: स्पेशल सीबीआई कोर्ट का आदेश
इससे पहले 4 मार्च 2025 को रायपुर की विशेष सीबीआई कोर्ट ने भूपेश बघेल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। (CBI Court Order)
कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद
सेक्स सीडी कांड की शुरुआत अक्टूबर 2017 में हुई थी, जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक कथित आपत्तिजनक सीडी सार्वजनिक की गई। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई और मामला धीरे-धीरे जांच एजेंसियों तक पहुंचा। वीडियो की सत्यता और इसके पीछे की साजिश को लेकर लंबे समय तक बहस चलती रही।
एफआईआर और जांच की दिशा
इस मामले में पंडरी थाने में पहली शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें ब्लैकमेलिंग और अवैध लेन-देन के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान दिल्ली तक तार जुड़े और सीडी तैयार किए जाने के दावे सामने आए। बाद में केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
गिरफ्तारी और सियासी असर
सितंबर 2018 में भूपेश बघेल और वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा की गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे दी थी। गिरफ्तारी के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और यह मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन गया। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भारी बहुमत मिला।
अन्य आरोपियों पर भी नजर
इस प्रकरण में कारोबारी कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा सहित अन्य आरोपी भी शामिल हैं। सेशन कोर्ट ने इन आरोपियों को फिलहाल राहत देने से इनकार किया है, यह कहते हुए कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। मामले में एक आरोपी की आत्महत्या भी इसे और संवेदनशील बनाती है।
23 फरवरी की सुनवाई अहम
अब सभी की निगाहें 23 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। यह दिन तय करेगा कि सेक्स सीडी केस किस दिशा में आगे बढ़ेगा और क्या यह मामला एक बार फिर राज्य की राजनीति में बड़ा असर डालेगा।




