Shankaracharya Statement Row : दुर्ग में गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर अपनी बात साफ शब्दों में रखी। उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान गंगा स्नान को लेकर जो बातें सामने आईं, वे वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शातीं।
प्रशासनिक व्यवस्था बना कारण
शंकराचार्य निश्चलानंद के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोका नहीं गया था। समस्या केवल उस समय होने वाले तामझाम और उससे पैदा होने वाली अव्यवस्था को लेकर थी। प्रशासन का उद्देश्य व्यवस्था बनाए रखना था, न कि धार्मिक अधिकारों में कोई हस्तक्षेप करना—यही तथ्य इस पूरे घटनाक्रम का आधार है।
‘मामला गलत ढंग से पेश हुआ’
पीठाधीश्वर ने यह भी कहा कि पूरे प्रकरण को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उससे भ्रम की स्थिति बनी। उनके मुताबिक, संदर्भ से अलग करके बात रखने से मामला अनावश्यक रूप से तूल पकड़ गया, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे अलग थी ।
बिना स्नान विदा
उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले से विदा लेने का निर्णय लिया और काशी प्रस्थान किया। उन्होंने कहा कि मन व्यथित होने के कारण वे स्नान किए बिना लौट रहे हैं। यह फैसला व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़ा बताया जा रहा है, न कि किसी औपचारिक रोक से ।
दुर्ग दौरे की पृष्ठभूमि
शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती इन दिनों हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। दुर्ग पहुंचने पर स्टेशन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वे भक्तों से संवाद करेंगे और आध्यात्मिक विषयों पर प्रवचन देंगे।
संवाद और संदेश पर जोर
दुर्ग प्रवास के दौरान शंकराचार्य का फोकस आध्यात्मिक चेतना और समाज में संतुलन के संदेश पर रहेगा। उनके अनुसार, किसी भी धार्मिक आयोजन में व्यवस्था और श्रद्धा—दोनों का सामंजस्य जरूरी है, तभी विवाद की गुंजाइश कम होती है।




