परंपरा और संवेदनशीलता पर बड़ा फैसला
सीजी भास्कर, 28 सितम्बर। मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार दशहरा पर्व पर परंपरागत रावण दहन तो होगा, लेकिन महिला अपराधियों के पुतले दहन पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला हाईकोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के बाद दिया, जिसमें इस प्रथा को महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया गया था। (Shoorpanakha Dahan Indore High Court)
याचिका में उठाया गया था गरिमा का सवाल
सोनम रघुवंशी की मां संगीता रघुवंशी ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि Shoorpanakha Dahan या महिला अपराधियों के प्रतीकात्मक पुतले जलाना सामाजिक रूप से अपमानजनक है। उनका कहना था कि दशहरे जैसे धार्मिक पर्व का इस्तेमाल किसी मृतक या आरोपी महिला के नाम पर पुतला दहन करने में नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे परिजनों की भावनाएं भी आहत होती हैं।
Shoorpanakha Dahan Indore High Court: अब दशहरे पर जलेगा सिर्फ रावण
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि धार्मिक आयोजनों का मकसद समाज में नैतिक और सकारात्मक संदेश देना होता है, न कि किसी वर्ग या लिंग विशेष को नीचा दिखाना। अदालत ने आदेश दिया कि इस बार इंदौर में केवल पारंपरिक Ravan Dahan ही होगा। सोनम, मुस्कान सहित 11 महिला अपराधियों के पुतले नहीं जलाए जाएंगे।
परिवार ने फैसले को बताया राहत
फैसले के बाद सोनम की मां संगीता रघुवंशी ने अदालत के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पीड़ित परिवारों के लिए सम्मानजनक है। उनकी बेटी का नाम बदनाम करने वाली परंपरा पर रोक लगाकर अदालत ने न्याय का संदेश दिया है।
Shoorpanakha Dahan Indore High Court: समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
हालांकि इस आदेश को लेकर समाज में राय बंटी हुई है। कुछ लोग मानते हैं कि Shoorpanakha Dahan Indore High Court का फैसला महिलाओं की गरिमा की रक्षा करता है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि अदालत ने रीति-रिवाजों में अनावश्यक दखल दिया है।


