सीजी भास्कर, 12 जनवरी। मतदाता सूची (SIR Voter List Problem) के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के तहत प्रदेशभर में लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 6.40 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। ये वे मतदाता हैं, जिन्होंने एसआईआर फार्म तो लिया, लेकिन निर्धारित समय में उसे जमा नहीं किया।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति या उसके परिवार का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो उसे निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 13 दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने का दावा प्रस्तुत करना होगा। यहीं से समस्या की असली शुरुआत हो रही है।
अशिक्षित और भूमिहीन परिवार सबसे ज्यादा परेशान
आयोग (SIR Voter List Problem) के इस निर्देश का सबसे अधिक असर अशिक्षित, गरीब और भूमिहीन परिवारों पर पड़ रहा है। ऐसे परिवारों के पास आमतौर पर केवल आधार कार्ड और राशन कार्ड ही उपलब्ध हैं, लेकिन आयोग की 13 दस्तावेजों की सूची में ये दोनों ही शामिल नहीं हैं। नतीजतन, दस्तावेज सत्यापन केंद्रों पर पहुंच रहे लोगों को अधिकारी वापस लौटा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मान्य दस्तावेजों की सूची के अनुरूप कागजात जुटाना पढ़े-लिखे, शहरी या सरकारी नौकरी से जुड़े लोगों के लिए अपेक्षाकृत आसान है, जबकि गांवों और शहरी झुग्गी इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए यह लगभग असंभव साबित हो रहा है। यही कारण है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है।
जमीनी हकीकत: कागज नहीं, तो पहचान भी नहीं
नगर निगम जोन-7 में 65 वर्षीय वृद्ध महिला दुखिया साहू राशन कार्ड लेकर दावा केंद्र पहुंचीं। अधिकारियों ने बताया कि यह दस्तावेज मान्य नहीं है। दुखिया साहू ने बताया कि वह कभी स्कूल नहीं गईं, इसलिए उनके पास कोई शैक्षणिक प्रमाण पत्र नहीं है। गरीबी के कारण उन्होंने कभी जमीन नहीं खरीदी, न ही उन्हें किसी सरकारी भूमि आवंटन का प्रमाण पत्र मिला। उनके जन्म के समय जन्म प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था भी नहीं थी। वर्तमान में उनके पास केवल आधार और राशन कार्ड ही हैं।
इसी तरह जोन-4 में एक अन्य व्यक्ति भी आधार कार्ड लेकर पहुंचा, लेकिन दस्तावेज अमान्य होने के कारण उसे भी निराश लौटना पड़ा। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां वर्षों से मतदान कर रहे लोग अब खुद को मतदाता साबित करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
अधिकारियों का पक्ष: बाद में मिलेगा विकल्प
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों (SIR Voter List Problem) का कहना है कि एसआईआर के तहत दस्तावेजों की जांच और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया सख्त नियमों के अनुसार की जा रही है। बिना आयोग द्वारा मान्य दस्तावेजों के नाम जोड़ा जाना संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया समाप्त होने के बाद नए सिरे से मतदाता सूची में नाम जोड़ने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
उस चरण में ऑफलाइन और ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से आधार कार्ड के आधार पर नाम जोड़ा जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, इसलिए लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन फिलहाल नियमों का पालन अनिवार्य है।
केवल ये दस्तावेज हैं मान्य
निर्वाचन आयोग (SIR Voter List Problem) द्वारा मान्य दस्तावेजों में भारत या विदेश में जन्म से संबंधित प्रमाण पत्र, सरकारी कर्मचारी या पेंशन आदेश, 1 जुलाई 1987 से पहले जारी पहचान पत्र, सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मान्य बोर्ड या विश्वविद्यालय का शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, एनआरसी, परिवार रजिस्टर, सरकारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र सहित आयोग की निर्धारित गाइडलाइन शामिल हैं। एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सबसे कमजोर तबके के नागरिकों के लिए केवल दस्तावेजों के आधार पर लोकतांत्रिक अधिकार तय करना न्यायसंगत है।


