सीजी भास्कर, 10 जनवरी। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा तालाब (Telibandha Talab Model) की तर्ज पर अब प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों में एक-एक तालाब को स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर नगर निगमों को निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत तालाबों को RFP (Request For Proposal) के माध्यम से PPP मॉडल (Public Private Partnership) पर विकसित किया जाएगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, चयनित तालाबों (Telibandha Talab Model) को स्मार्ट लेक के रूप में विकसित करने के लिए निजी एजेंसियों की भागीदारी तय की गई है। इसके लिए निकायों को RFP प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी रूप से सक्षम और अनुभवी कंपनियों का चयन किया जा सके।
क्या-क्या होगा स्मार्ट लेक परियोजना में
इस योजना (Telibandha Talab Model) के तहत चयनित निजी एजेंसियों को तालाबों की डी-सिल्टिंग, नियमित सफाई, गंदे पानी और सीवेज की आवक रोकने, जल उपचार, सौंदर्यीकरण और 10 से 15 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। तालाबों में आधुनिक एरेशन सिस्टम, बायो-रिमेडिएशन तकनीक, वॉकिंग ट्रैक, हाई-मास्ट लाइटिंग, फाउंटेन और ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएंगी, ताकि तालाब केवल जलस्रोत ही नहीं बल्कि शहर का आकर्षण भी बन सकें।
सरकार का मानना है कि PPP मॉडल के जरिए निजी निवेश और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर शहरी जलस्रोतों का स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है। इस योजना का उद्देश्य तालाबों को सिर्फ पानी के भंडारण तक सीमित न रखकर उन्हें पर्यावरण, पर्यटन और शहर की पहचान के रूप में विकसित करना है।
इसलिए जरूरी है स्मार्ट तालाब योजना
प्रदेश के अधिकांश शहरी तालाब वर्तमान में सीवेज, अतिक्रमण और गाद की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। कई तालाब प्रदूषित होने के कारण अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। सरकार का मानना है कि यदि इन तालाबों को तेलीबांधा मॉडल पर विकसित किया जाए तो यह भू-जल रिचार्ज, जल संरक्षण और शहरी पर्यावरण सुधार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
(Telibandha Talab Model) ऐसे होगा निजी कंपनियों का चयन
RFP प्रक्रिया में उन निजी कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास वॉटर ट्रीटमेंट, अर्बन लेक रिवाइवल और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स का अनुभव होगा। कंपनियों का चयन उनकी तकनीकी योग्यता, वित्तीय क्षमता और पूर्व में किए गए प्रोजेक्ट्स के आधार पर किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तालाबों का विकास लंबे समय तक टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण रहे।
नगर निगमों को क्या होगा सीधा लाभ
छत्तीसगढ़ के सभी नगर निगमों में एक-एक तालाब के कायाकल्प से सिर्फ सौंदर्यीकरण ही नहीं होगा, बल्कि इसका सीधा असर शहरों की अर्थव्यवस्था, जलसंकट और पर्यावरण पर भी पड़ेगा।
बिलासपुर
अरपा नदी के आसपास और शहर के पुराने तालाबों के कायाकल्प से
– गर्मियों में जल संकट में कमी आएगी
– शहर को नया वॉटरफ्रंट लुक मिलेगा
– स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को मजबूती मिलेगी
दुर्ग–भिलाई
यहां तालाबों में औद्योगिक प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है।
– कायाकल्प से जहरीले पानी का उपचार संभव होगा
– नागरिकों को स्वच्छ जल स्रोत मिलेंगे
– आसपास के इलाकों की जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी होगी
कोरबा
कोयला खदानों और पावर प्लांट से प्रभावित जलस्रोतों के लिए यह योजना गेमचेंजर साबित हो सकती है।
– तालाबों से प्रदूषण हटेगा
– हरियाली बढ़ेगी
– CSR और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा


