सीजी भास्कर, 2 मार्च। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत की सियासत में भी बहस तेज (Sonia Gandhi Statement On Iran) हो गई है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख लिखकर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ हुई एकतरफा सैन्य कार्रवाई को खतरनाक बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी भारत की घोषित विदेश नीति के सिद्धांतों से पीछे हटने जैसी प्रतीत होती है।
सोनिया गांधी ने अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमले और लक्षित कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती हैं। उन्होंने ईरानी जनता और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
अपने लेख में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध (Sonia Gandhi Statement On Iran) है। उनके अनुसार यदि ऐसे मामलों में सिद्धांतों की रक्षा नहीं की गई तो नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
सोनिया गांधी ने कहा कि किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार का संकेत है। ऐसे समय में भारत सरकार द्वारा ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन पर स्पष्ट रुख न अपनाना चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि चुप्पी को तटस्थता नहीं माना जा सकता।
उन्होंने भारत और ईरान के ऐतिहासिक व रणनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सभ्यतागत जुड़ाव और ऊर्जा सहयोग रहा है। खाड़ी देशों में बसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आगाह किया कि क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर भारतीय समुदाय पर पड़ सकता है।
सोनिया गांधी ने मांग की कि संसद में इस विषय पर खुली चर्चा होनी (Sonia Gandhi Statement On Iran) चाहिए। उनके अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत की कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं जैसे मुद्दों पर रणनीतिक स्पष्टता और लोकतांत्रिक जवाबदेही आवश्यक है।





