सीजी भास्कर, 10 जनवरी। मोहगांव, पिपरिया (जिला कबीरधाम) के चंद्र कुमार चंद्रवंशी को यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा इन हंट्सविल, अमेरिका में स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी (Space Science Research) के क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए चुना गया है। यह अवसर उन्हें उनके पीएचडी कार्यक्रम की शुरुआत में ही मिला है और यह उनके लिए पहला अंतरराष्ट्रीय अनुभव होगा।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से हासिल की उपलब्धि
चंद्र कुमार का परिवार खेती से जुड़ा हुआ है और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने एमएससी की पढ़ाई रविवि, भौतिकी एवं खगोल भौतिकी विभाग से पूरी की। वर्ष 2025 में पीएचडी में प्रवेश लेने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च (Space Science Research) का अवसर हासिल किया। वे 31 जनवरी 2026 को अमेरिका के लिए रवाना होंगे।
इसरो और नासा के डेटा पर करेंगे काम
अमेरिका में तीन महीने रहने के दौरान चंद्र कुमार को एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी। इस अवधि में रहने, खाने और आने-जाने का पूरा खर्च भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा। वे इसरो और नासा के सैटेलाइट (ISRO and NASA Satellite Data) से मिलने वाले डेटा पर रिसर्च करेंगे और सीखेंगे कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा एनालिसिस और रिसर्च कैसे की जाती है।
Space Science Research एक्स-रे बाइनरी स्टार्स
वर्तमान में चंद्र एक्स-रे बाइनरी स्टार्स (X-ray Binary Stars) पर रिसर्च कर रहे हैं, जिसमें ब्लैक होल, पल्सर और न्यूट्रॉन स्टार्स जैसे कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट्स शामिल हैं। यह हाई एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स का चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। अमेरिका की ट्रेनिंग से लौटने के बाद उनका शोध और अधिक मजबूत होगा और भविष्य में उन्हें अंतरराष्ट्रीय रिसर्च (International Research Opportunities) के और अवसर मिलेंगे।
प्रोफेसर का कहना
रविवि के प्रोफेसर एनके चक्रधारी ने बताया कि पीएचडी के दौरान अधिकांश छात्रों को विदेश में ट्रेनिंग का मौका नहीं मिलता। ऐसे में ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े चंद्र का अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटी में चयन (Space Science Research) एक विशिष्ट उपलब्धि मानी जा रही है।


