सीजी भास्कर, 8 सितम्बर |
Steel from Chhattisgarh ने रचा नया इतिहास
छत्तीसगढ़ (Steel from Chhattisgarh) ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है। भिलाई स्टील प्लांट से भेजे गए करीब 30-35 हजार टन लोहे से मिजोरम की राजधानी आइजोल में देश का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज तैयार हुआ है। 114 मीटर ऊंचा यह ब्रिज अब राज्य की राजधानी को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ रहा है।
बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट से जुड़ा सपना
इस ब्रिज का निर्माण (Bairabi-Sairang Rail Project) के तहत किया गया। रेलवे की बिलासपुर जोन टीम, मशीनरी और इंजीनियरिंग सपोर्ट ने यहां लगातार काम किया। इस रेल लाइन के पूरे होने से अब सफर 7 घंटे से घटकर सिर्फ 3 घंटे में पूरा हो सकेगा।10 साल की मेहनत, 8 हजार करोड़ की लागत
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस ब्रिज और 51.38 किलोमीटर लंबी बइरबी-सायरंग रेल लाइन के निर्माण में 10 साल से ज्यादा वक्त और लगभग 8,071 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह प्रोजेक्ट 2014 में शुरू हुआ था।
अब यह न सिर्फ मिजोरम की राजधानी तक पहुँचा है, बल्कि भविष्य में म्यांमार बॉर्डर तक रेल लाइन बढ़ाने की योजना है।BSP Steel का कमाल
भिलाई स्टील प्लांट (BSP Steel Contribution) एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है। यहां से भेजा गया स्टील भारत के कई मेगा प्रोजेक्ट्स जैसे कि चिनाब ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और INS विक्रांत में भी इस्तेमाल हुआ है। मिजोरम प्रोजेक्ट के लिए अकेले BSP से 30-35 हजार टन स्टील सप्लाई हुआ।
देश का दूसरा सबसे बड़ा ब्रिज
यह ब्रिज 114 मीटर ऊंचा है। तुलना करें तो चिनाब नदी पर बना ब्रिज 359 मीटर ऊंचा है, जो दुनिया में सबसे ऊंचा है। इसके बाद मिजोरम का यह पियर ब्रिज (Second Highest Railway Bridge in India) देश में दूसरे नंबर पर आता है।आइजोल पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ा
आजादी के 75 साल बाद (Rail Connectivity to Aizawl) संभव हो सका है। अब मिजोरम की राजधानी देश के बाकी हिस्सों से सीधे ट्रेन के जरिए जुड़ चुकी है। इस उपलब्धि को भारतीय रेलवे के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
CPRO का बयान
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के CPRO ने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारतीय रेल के लिए ऐतिहासिक है। कठिन पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच से गुजरने वाली यह लाइन बनाने के लिए रेलवे को 200 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क भी तैयार करना पड़ा।



