सीजी भास्कर, 28 नवंबर | कोंडागांव में गुरुवार को स्कूली छात्रों द्वारा खेल मैदान पर प्रस्तावित सिविल कोर्ट भवन निर्माण के विरोध में निकाली गई रैली ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। मामला अदालत की नजर में आने के बाद “Student Protest Issue” नई दिशा में बढ़ गया है। जिला न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि वैकल्पिक मैदान उपलब्ध नहीं कराया गया है, तो प्रशासन को इसकी वजह सहित सभी दस्तावेज़ 1 दिसंबर तक प्रस्तुत करने होंगे।
कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल: नाबालिग सड़क पर क्यों?
जिला न्यायालय और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण चतुर्वेदी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव को निर्देश दिए हैं कि पूरा मामला तथ्यों के साथ सामने रखा जाए। अदालत ने यह भी पूछा कि स्कूली समय में नाबालिग छात्र—छात्राओं को सड़क पर उतरने की स्थिति आखिर क्यों बनी? बच्चों की मांगें क्या हैं और उनका वैधानिक आधार क्या है? यह पूरा मुद्दा सीधे तौर पर नाबालिगों के संरक्षण और उनके अधिकारों से जुड़ा माना गया है।
Student Protest Issue : भूमि आवंटन के दस्तावेज़, 15 वर्षों का रिकॉर्ड मांगा गया
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवादित भूमि से जुड़े पिछले 15 वर्षों के अभिलेख, आवंटन के कागजात और वर्तमान स्थिति की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि 2014 में कोर्ट भवन के लिए भूमि आवंटित होने के बाद, शिक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन ने वैकल्पिक मैदान की व्यवस्था को लेकर कौन-कौन से प्रयास किए।
क्या है पूरा विवाद? छात्रों का कहना—‘मैदान हमारा है’
शहर के महात्मा गांधी वार्ड स्थित पीएम श्री आत्मानंद स्कूल के सामने वाले मैदान में कोर्ट भवन निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी थी। नींव के लिए खोदे गए गड्ढों को देखकर छात्रों का गुस्सा बढ़ा और फिर सोमवार से लगातार आंदोलन की तस्वीरें सामने आने लगीं। स्टूडेंट्स और पेरेंट्स का कहना है कि यह मैदान सालों से खेलकूद, स्कूल गतिविधियों और बच्चों के दैनिक अभ्यास का मुख्य केंद्र रहा है।
गुरुवार को छात्रों ने कुदाल उठाकर भरे गड्ढे, रैली भी निकाली
बच्चों ने सुबह स्कूल पहुंचते ही मैदान में खुदाई के गड्ढों को कुदाल और फावड़ा उठाकर भरना शुरू कर दिया। उसके बाद छात्रों ने शहर में रैली निकाली, जिसमें “मैदान बचाओ” और “कोर्ट कहीं और बनाओ” जैसे नारे गूंजते रहे। इस पूरी प्रक्रिया को अदालत ने “Protest Ground Issue” मानते हुए गंभीरता से दर्ज किया है।
अधिकारियों की अपील—शांतिपूर्वक समाधान की कोशिश
विरोध बढ़ते देख प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों तथा अभिभावकों से बातचीत की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि समाधान शांतिपूर्वक खोजा जाएगा, लेकिन छात्रों ने साफ कहा कि जब तक मैदान सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। बच्चों का कहना है कि न्यायालय भवन के लिए किसी वैकल्पिक स्थान का चयन संभव है, लेकिन मैदान का खोना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
SDM का बयान—भूमि 2014-15 में कोर्ट के लिए आवंटित
कोंडागांव SDM अजय उरांव ने जानकारी दी कि 2014-15 में सिविल कोर्ट भवन निर्माण के लिए यह भूमि आवंटित की गई थी। गुरुवार को निर्माण कार्य शुरू होने पर छात्रों ने अचानक विरोध दर्ज कराया। SDM का कहना है कि प्रशासन उनकी मांगों और आपत्तियों को संज्ञान में लेकर विस्तृत रिपोर्ट अदालत के सामने प्रस्तुत करेगा।
अगला कदम अदालत के फैसले पर निर्भर
अब जिला न्यायालय के निर्देश के अनुसार, प्रशासन और संबंधित विभागों को सोमवार तक सभी दस्तावेज़ों के साथ पूरी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। अदालत का कहना है कि तथ्य स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्यवाही के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सकेगा।





