सीजी भास्कर, 14 जनवरी। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में शांति की दिशा में एक और अहम कदम सामने आया है। दरभा डिवीजन के अंतर्गत सक्रिय 29 नक्सलियों ने हिंसा (Sukma Naxal Surrender) का रास्ता छोड़ते हुए जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी ने राज्य शासन की पुनर्वास नीति ‘पूना मार्गेम (नई राह)’ के तहत मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
बुधवार को आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी नक्सली दरभा डिवीजन की केरलापाल एरिया कमेटी में सक्रिय थे और लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से कई कैडर जिले में हुई बड़ी नक्सली घटनाओं में भी शामिल रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के सामने किया सरेंडर
आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया सुकमा में एसपी किरण चव्हाण, एएसपी रोहित शाह और सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे की मौजूदगी (Sukma Naxal Surrender) में पूरी हुई। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार दबाव, अभियानों और पुनर्वास नीति के चलते नक्सलियों का संगठन से भरोसा कमजोर हुआ है।
नए सुरक्षा कैंप से टूटा नक्सलियों का नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गोगुंडा क्षेत्र में स्थापित नए सुरक्षा कैंप ने नक्सलियों के लिए हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। इस कैंप की वजह से न केवल नक्सलियों का आधार क्षेत्र सिमटा है, बल्कि उनका रसद तंत्र और सूचना नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सुरक्षा बलों का दावा है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद केरलापाल एरिया कमेटी अब नक्सल मुक्त होने के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
पुनर्वास नीति बन रही भरोसे की वजह
प्रशासन का मानना है कि ‘पूना मार्गेम’ जैसी पुनर्वास योजनाएं नक्सल (Sukma Naxal Surrender) प्रभावित इलाकों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को न केवल आर्थिक सहायता दी जाएगी, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।


