सीजी भास्कर, 08 जून। गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा क्षेत्र में एक बार फिर विकास कार्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से पेयजल और जल उपलब्धता की समस्या से जूझ रहे लोगों के बीच नई उम्मीद जगी है। क्षेत्र के ग्रामीणों का मानना है कि इस फैसले से आने वाले समय में पानी की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर भी इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह कार्य समय पर पूरा होता है तो न केवल घरों तक पानी पहुंचेगा, बल्कि किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। यही वजह है कि इसे क्षेत्र के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
जलप्रदाय योजना को मिलेगा मजबूत सहारा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंजूरी के बाद लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से एनीकट का निर्माण किया जाएगा। यह संरचना सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना के लिए सपोर्ट सिस्टम का काम करेगी और सालभर पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मददगार साबित होगी।
एनीकट बनने से गर्मी के मौसम में भी तेल नदी से पर्याप्त जल मिलता रहेगा। इससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम हो जाएगी।
भूजल स्तर बढ़ाने में भी मिलेगी मदद
सिंचाई विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार एनीकट निर्माण के बाद इंटेक वेल के आसपास जलभराव और नमी बनी रहेगी। इससे क्षेत्र में भूजल स्तर को रिचार्ज होने में सहायता मिलेगी।
इसके साथ ही कृषि और उद्यानिकी गतिविधियों के लिए भी वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का रास्ता मजबूत होगा।
जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार
जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप और जिला पंचायत सदस्य देशबंधु नायक ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय देवभोग और आसपास के क्षेत्रों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
क्या है सामूहिक जलप्रदाय योजना
सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना पर पिछले कई वर्षों से काम चल रहा था। वर्ष 2024 में जल जीवन मिशन के तहत करीब 8 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना को मंजूरी मिली थी।
योजना के माध्यम से तेल नदी का पानी शोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा और वहां से शुद्ध पेयजल 9 गांवों के 2074 परिवारों तक उपलब्ध कराया जाएगा। प्रत्येक परिवार को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में पेयजल देने का लक्ष्य रखा गया है।
तेजी से पूरा हो रहा निर्माण कार्य
योजना के तहत तेल नदी किनारे 21 मीटर ऊंचा इंटेक वेल तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए नदी के सतही और गहराई में उपलब्ध पानी को संग्रहित किया जाएगा। बाद में उच्च क्षमता वाले पंपों की मदद से पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
शुद्धिकरण के बाद पानी को ओवरहेड टैंक में संग्रहित कर पाइपलाइन के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और वर्ष के अंत तक जल आपूर्ति शुरू होने की संभावना है।
एनीकट क्यों बना जरूरी
अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक सर्वे के आधार पर योजना तैयार की गई थी, लेकिन काम शुरू होने के बाद यह सामने आया कि तेल नदी में पूरे साल पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं रहता। कुछ महीनों बाद नदी का बड़ा हिस्सा सूखी रेत में बदल जाता है।
इसी कारण जलप्रदाय योजना को निरंतर संचालित रखने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत महसूस हुई। पहले बनाए गए ढांचे से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद एनीकट निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया।
किसानों को भी मिलेगा लाभ
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित एनीकट लगभग 300 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा होगा। इसका निर्माण आधुनिक तकनीक से किया जाएगा ताकि जल संरक्षण को मजबूत किया जा सके।
इसके बनने से रबी और खरीफ दोनों मौसमों में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं भविष्य में अन्य गांवों तक जलप्रदाय योजना का विस्तार करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



