Supreme Court Baby Swap Case : राजधानी रायपुर में बच्चा बदलने के गंभीर आरोपों से जुड़े एक पुराने मामले में अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद रायपुर पुलिस ने माता लक्ष्मी नर्सिंग होम और पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वर्ष 2023 से चला आ रहा विवाद
यह मामला वर्ष 2023 का है, जब एक दंपती ने अस्पताल प्रबंधन पर नवजात बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाया था। शिकायत पहले स्थानीय स्तर पर उठी, फिर मामला अदालतों तक पहुंचा और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
बिना सूचना ऑपरेशन थिएटर ले जाने का आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है कि गर्भवती महिला को बिना पूर्व जानकारी और सहमति के ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। प्रसव के बाद महिला ने बताया कि उसने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया, लेकिन कुछ समय बाद जो नवजात सौंपे गए, वे पहले बताए गए बच्चों से मेल नहीं खाते थे।
IVF प्रक्रिया से जुड़ा पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी अशोक कुमार सिंह और उनकी पत्नी उषा सिंह संतान प्राप्ति के लिए रायपुर आए थे। माता लक्ष्मी नर्सिंग होम में संचालित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर में उनका इलाज किया गया, जहां (IVF Treatment Case) के तहत प्रक्रिया पूरी की गई।
जुड़वा बच्चों की पुष्टि के बाद बढ़ा संदेह
अप्रैल 2023 में दोबारा आईवीएफ प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों ने जुड़वा बच्चों की पुष्टि की थी। इसके बाद 25 दिसंबर 2023 को अचानक डिलीवरी कराई गई। परिजनों का आरोप है कि उसी समय से नवजातों की पहचान को लेकर संदेह शुरू हुआ।
सवाल उठाने पर टालमटोल का आरोप
परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने डॉक्टरों और स्टाफ से नवजातों को लेकर सवाल किए, तो इसे गलतफहमी बताया गया। लेकिन जवाबों से संतुष्ट न होने पर परिवार ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने का फैसला किया।
निजी डीएनए जांच ने बदली दिशा
संदेह गहराने पर परिजनों ने निजी एजेंसी से डीएनए जांच कराई। रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला कानूनी मोड़ पर पहुंचा और हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां से पुलिस जांच के आदेश दिए गए।
अस्पताल, डॉक्टर और लैब जांच के घेरे में
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद माता लक्ष्मी नर्सिंग होम, पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर, उसके संचालक, संबंधित डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और रिपोर्ट की पड़ताल कर रही है।
जांच जारी, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा माना जा रहा है।




